
तुलसी के नियम
तुलसी को भगवान श्रीहरि की प्रिय भक्त माना जाता है, इसके साथ ही ये माता लक्ष्मी का स्वरूप भी मानी जाती हैं। एकादशी के दिन तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला उपवास करती हैं, इसलिए इस दिन ना ही तुलसी के पत्तों को तोड़ा जाता है और ना ही तुलसी के पौधे में जल डाला जाता है। इसके साथ ही द्वादशी के दिन भी तुलसी में जल नहीं दिया जाता है, ना ही पत्तों को तोड़ा जाता है।
हिंसा ना करें
एकादशी के दिन चाहे आप व्रत करें या ना करें, आपका पूरा ध्यान केवल श्रीहरि की उपासना पर होना चाहिए। यदि इस दिन आप दूसरे व्यक्ति की बुराई करेंगे और किसी को अपशब्द कहेंगे तो आप कहीं ना कहीं पाप के भागीदारी बनेंगे और एकादशी के पुण्यों से वंचित रह जाएंगे।
भोजन के नियम
जिन लोगों ने एकादशी का व्रत किया है, उन्हें केवल फलाहार ही ग्रहण करना चाहिए लेकिन जिन लोगों ने उपवास नहीं किया है, उन लोगों को भी केवल सात्विक आहार स्वीकार करना चाहिए, इस दिन घर में तामसिक भोजन जैसे मास मदिरा, लहसुन-प्याज को नहीं बनाना चाहिए।
पूजा की सही दिशा
एकादशी के दिन की पूजा को सनातन धर्म में अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है, इसके लिए जरूरी है कि आप पूजा के लिए सही दिशा का चयन करें। पूजा के लिए श्रेष्ठ दिशा ईशान कोण माना गया है यानी उत्तर-पूर्व दिशा। लेकिन अगर आप दक्षिण दिशा की ओर मुख करके उपासना कर रहे हैं, तो ये आपके लिए नुकसानदायी हो सकता है।
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