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पंचगंगा काशी में गंगा दशहरा महापूजन और अनुष्ठान
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पंचगंगा काशी में गंगा दशहरा महापूजन और अनुष्ठान

Tue 26 May 2026
Panch Ganga, Kashi khand
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Benefits

 

  • पितृ दोष निवारण
  • दस प्रकार से पापों का शमन 
  • कष्ट दूर होते हैं
  • मानसिक शांति
  • सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति

Description

गंगा दशहरा क्यों मनाते हैं?

 

  • गंगा दशहरा अत्यंत पवित्र पर्व है, जिसे मां गंगा के धरती पर अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरी थीं, ताकि भागीरथ के पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त हो सके। इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है, इसलिए इसे दशहरा कहा जाता है। 


 गंगा दशहरा महापूजन और अनुष्ठान

 

  • काशी, जिसे शिवनगरी कहा जाता है कि वहां के  पंचगंगा घाट पर पर गंगा दशहरा के पावन पर्व पर विशेष पूजन का आयोजन किया जाता है। इसी पावन अवसर को देखते हुए पंचगंगा काशी में माय ज्योतिष द्वारा विशेष महापूजन और वैदिक अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है। इस पावन अवसर पर मां गंगा का दुग्धाभिषेक, पुष्प अर्पण, दीपदान और गंगा आरती की जाती है। विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई जाती है, जिससे वातावरण पूर्ण रूप से भक्तिमय और दिव्य हो उठता है। श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और पितरों की मुक्ति के लिए संकल्प लेकर इस अनुष्ठान में भाग लेते हैं। माना जाता है कि पंचगंगा घाट पर किया गया पूजन विशेष फलदायी होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

 

हमारी सेवाएं :

 

  • मंदिर के प्रांगण में अनुभवी पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से दीपदान और गंगा आरती पूजा संपन्न की जाएगी। 
  • पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
  • पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे

 

 

Temple Details

Temple

पंचगंगा घाट का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व गहरा है और यह श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रातःकालीन गंगा आरती देखने हेतु एक लोकप्रिय स्थल है। यह भावपूर्ण 'आरती' देवी गंगा की स्तुति हेतु की जाती है और घाट के दिव्य उद्देश्य पर प्रकाश डालती है। आरती करते समय, पुजारी केंद्रीय मंच पर आते हैं और कई अत्यंत विस्तृत अनुष्ठान करते हैं, जिनमें तेल के दीपक, पाठ और अर्पण शामिल हैं, जो इसे पूरी तरह से मनोरंजक और आध्यात्मिक रूप से परिपूर्ण बनाते हैं।

पंचगंगा घाट वह स्थान है जहाँ पाँच पवित्र नदियाँ मिलती हैं कहा जाता है कि अन्य पाँच या चार नदियाँ धरती माता में विलीन हो गई हैं। एक और रोचक तथ्य यह है कि पंचगंगा घाट का उपयोग वेदांत रामानंद के शिक्षण स्थल के रूप में किया जाता था, जो भारत के सबसे प्रसिद्ध संतों में से एक, कबीर के गुरु थे। ऐसा भी कहा जाता है कि महान संत कवि तुलसीदास ने इसी घाट पर 'विनय पत्रिका' लिखी थी।

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MyJyotish ऑनलाइन पूजा बुक करने के लिए एक बेहतरीन प्लेटफ़ॉर्म है। मैंने घर बैठे ही पूजा में भाग लिया और पूरे अनुष्ठान के दौरान स्वयं को आध्यात्मिक रूप से जुड़ा हुआ महसूस किया। यह अनुभव बहुत सहज, सुविधाजनक और संतोषजनक रहा।

ऑनलाइन पूजा को लेकर शुरुआत में मुझे थोड़ी शंका थी, लेकिन MyJyotish के साथ मेरा अनुभव बहुत सकारात्मक रहा। पूजा पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हुई और मैं पूरे समय उससे जुड़ा हुआ महसूस करता रहा।

व्यस्त जीवनशैली के कारण मंदिर जाना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन MyJyotish की मदद से मैं घर बैठे ही पूजा में शामिल हो सका। यह अनुभव सुविधाजनक होने के साथ-साथ आध्यात्मिक रूप से भी बहुत संतोषजनक था।

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