वर्तमान युग में जो देवी-देवताओं सबसे ज्यादा पूजे जाते हैं। उनमें लक्ष्मी जी एक हैं। लक्ष्मी जी की रोज़ पूजा करने से मनुष्य के जीवन में दरिद्रता नहीं आती है। लक्ष्मी जी को धन और वैभव की देवी माना जाता है। समुद्र मंथन के द्वारा लक्ष्मी जी प्रकट हुई थीं। समुद्र मंथन के दौरान देवताओं को 14 रत्नों की प्राप्ति हुई जिसमें से एक लक्ष्मी जी थी। लक्ष्मी जी के एक हाथ में धन से भरा कलश और दूसरा हाथ अभय मुद्रा में था। देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना विशेष महत्वपूर्ण माना गया है। इससे मां लक्ष्मी जल्दी ही प्रसन्न हो जाती हैं।
लक्ष्मी चालीसा पढ़ने से मनुष्य की दरिद्रमा हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। रोज नियम से इस चालीसा का पाठ करने से शुक्र ग्रह के दोष खत्म हो जाते हैं और शुक्र ग्रह से होने वाली पीड़ा दूर हो जाती है। जिससे धन लाभ और सुख-समृद्धि मिलती है। लक्ष्मी जी की चालीसा पाठ करने से मनोकामनाएं भी पूरी हो जाती हैं।
दोहा
मातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस॥
सिंधु सुता विष्णुप्रिये नत शिर बारंबार
ऋद्धि सिद्धि मंगलप्रदे नत शिर बारंबार॥ टेक॥
सोरठा
यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करूं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥
॥ चौपाई ॥
सिन्धु सुता मैं सुमिरौं तोही। ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोहि॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरबहु आस हमारी॥