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गुरु चांडाल शांति पूजा
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गुरु चांडाल शांति पूजा

Thu 04 June 2026
Navgrah Shani Mandir,Ujjain Madhya Pradesh
Prasad Box
2500951(62% OFF)

Booking Closes in:

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Puja Benefits

 

  • नौकरी में पदोन्नति होती है।
  • व्यापार में वृद्धि एवं मान - प्रतिष्ठा रहती है।
  • जीवन साथी के साथ सुखद रिश्तें होतें है।
  • शारीरिक समस्याएं दूर होती है ।
  • ब्रहस्पति के साथ राहू का संगम एक अच्छा संगम नहीं माना जाता है ।
  • कुंडली में राहू- ब्रहस्पति के मिलन को गुरु चांडाल दोष कहते है ।
  • ब्रहस्पति ज्ञान का ग्रह है और राहू संयोग का ग्रह है तो इनका संगम चिंता का विषय है ।

Description

प्रभाव :-

  • जीवन में दुख आजा ता है और ज़िंदगी जैसे ठरजाती है ।
  • व्यापार में भोट नुकसान होने लग जाते है । 
  • नौकरी मिलने में परेशानी आने लगजाती है और अगर नौकरी मिल भी जाए तो तरकी नहीं मिलती ।
  • पारिवारिक आशान्ति रहती है ।
  • वित्तीय समस्याएं रहती है ।
  • संतान से विवाद होने लग जाते है ।

 

हमारी सेवाएँ :

  • उज्जैन तीर्थ क्षेत्र में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से गुरु चांडाल दोष शांति पूजन कराया जाएगा। 
  • पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
  • पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे।

प्रसाद :

  • पंचमेवा
  • दान वस्तु एक छोटे पैकेट में होंगी | दान वस्तु को शनिवार या रविवार के दिन सूर्यास्त से पहले बहते हुए पानी में बहा दे।

Temple Details

Temple

नवग्रहों की तपस्थली

स्कंद पुराण के अनुसार नवग्रहों ने भी इस पावन स्थल पर आकर शिवलिंग स्थापित किए और तपस्या कर भगवान शिव से वरदान प्राप्त किए। उनके द्वारा स्थापित लिंगों के नाम हैं- नरादित्य, सोमेश्वर, मंगलेश्वर, बुधेश्वर, बृहस्पतीश्वर, शुक्रेश्वर, स्थावरेश्वर, मुनीश्वर, राहु-केतुऐश्वर।....जहां क्षिप्रा, क्षाता, और गुप्त सरस्वती नदियाँ मिलती हैं, उसे त्रिवेणी संगम कहते हैं। यह स्थान मोक्ष प्रदायक माना गया है। यहां स्नान, दान और स्थावरेश्वर महादेव के दर्शन से समस्त पापों का नाश होता है और शनि पीड़ा का शमन होता है। इसी कारण यह स्थान नवग्रह त्रिवेणी शनि मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ। 
उज्जैन के त्रिवेणी संगम पर ही राजा विक्रमादित्य ने भगवान शनिदेव और नवग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा करवाई और एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। आज भी यह स्थान भक्तों के लिए आस्था और शांति का केंद्र बना हुआ है। यहां शनि देव के साथ दाईं ओर श्री गणेश जी, बाईं ओर ढैय्या शनि, पीछे श्री बालाजी हनुमान विराजमान हैं।

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