शनि देव को सूर्य पुत्र एवं कर्म फल दाता के रूप में जाना जाता है। यह एक लंबे अंतराल के बाद एक राशि से दूर राशि में प्रवेश करता है। यह एक मात्र ग्रह है जिसकी अनुकम्पा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यदि इसके शुभ प्रभाव किसी पर पड़ जाएं तो उससे भाग्यशाली इस पूरे संसार में कोई नहीं रह जाता। वही दूसरी ओर यदि इसके दुष्प्रभाव किसी पर पड़ जाएं तो उसका सारा जीवन उथल -पुथल हो जाता है। उसके जीवन में परेशानिया बढ़ने लगती है। इन परेशानियों से मुक्ति प्राप्तकर शनि देव की कृपा प्राप्ति के लिए उनका तेल अभिषेक किया जाता है जिससे वह बहुत प्रसन्न होतें है तथा अपने भक्तों के सभी कष्टों को दूर कर देतें है।
कोकिलावन शनिदेव मंदिर मथुरा शहर के नंदगाव स्थित है।मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में श्री कृष्ण के दर्शनों के लिए शनि महाराज ने कठोर तपस्या की थी। शनि की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान श्री कृष्ण ने कोयल के रुप में शनि महाराज को दर्शन दिया थे। जिसके कारण ही इस स्थान को आज कोकिला वन के नाम से जाना जाता है। कहते हैं जो यहां शनि महाराज की पूजा करते हैं उन्हें शनि की दशा, साढ़ेसाती और ढैय्या में शनि नहीं सताते।वह भक्त जो यहाँ शनि देव का पूजन करते है उनपर शनि की दृष्टि का वक्र नहीं पड़ता बल्कि उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। पूर्ण श्रद्धा से उनकी आरधना व तेल अभिषके करवाने से दूर हो जाती है यह दिक्कतें।
हमारी सेवाएं :-
- मंदिर के प्रांगण में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से पूजा संपन्न की जाएगी।
- पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
- पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे।
प्रसाद :-
- पंचमेवा
- ग्रह शनि से संबंधित दान वस्तुओं से युक्त एक छोटा पैकेट भिजवाया जाएगा उसी को सूर्यास्त से पहले किसी भी रविवार को बहते पानी में विसर्जित कर देना चाहिए।