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शनि साढ़े साती पूजा
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शनि साढ़े साती पूजा

Sat 06 June 2026
Navgrah Shani Mandir, Ujjain Madhya Pradesh
Prasad Box
2100951(55% OFF)

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Puja Benefits

शनि की साढ़े साती और ढैय्या से होने वाली समस्याएं :-

  • आर्थिक दिक्कतें
  • मनचाही नौकरी में परेशानियां
  •  व्यापार में उतार चढ़ाव
  • पारवारिक कलह- कलेश
  • विवाह में अड़चन आना
  • स्वास्थ्य खराब रहना
  • भवन निर्माण में रुकावट आना
  • कार्य स्थल पर अपमान का सामना करना

Description

शनि देव को सूर्य पुत्र एवं कर्म फल दाता के रूप में जाना जाता है। यह एक लंबे अंतराल के बाद एक राशि से दूर राशि में प्रवेश करता है। यह एक मात्र ग्रह है जिसकी अनुकम्पा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यदि इसके शुभ प्रभाव किसी पर पड़ जाएं तो उससे भाग्यशाली इस पूरे संसार में कोई नहीं रह जाता। वही दूसरी ओर यदि इसके दुष्प्रभाव किसी पर पड़ जाएं तो उसका सारा जीवन उथल -पुथल हो जाता है। उसके जीवन में परेशानिया बढ़ने लगती है। इन परेशानियों से मुक्ति प्राप्तकर शनि देव की कृपा प्राप्ति के लिए उनका तेल अभिषेक किया जाता है जिससे वह बहुत प्रसन्न होतें है तथा अपने भक्तों के सभी कष्टों को दूर कर देतें है।

कोकिलावन शनिदेव मंदिर मथुरा शहर के नंदगाव स्थित है।मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में श्री कृष्ण के दर्शनों के लिए शनि महाराज ने कठोर तपस्या की थी। शनि की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान श्री कृष्ण ने कोयल के रुप में शनि महाराज को दर्शन दिया थे। जिसके कारण ही इस स्थान को आज कोकिला वन के नाम से जाना जाता है। कहते हैं जो यहां शनि महाराज की पूजा करते हैं  उन्हें शनि की दशा, साढ़ेसाती और ढैय्या में शनि नहीं सताते।वह भक्त जो यहाँ शनि देव का पूजन करते है उनपर शनि की दृष्टि का वक्र नहीं पड़ता बल्कि उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। पूर्ण श्रद्धा से उनकी आरधना व तेल अभिषके करवाने से दूर हो जाती है यह दिक्कतें।

हमारी सेवाएं :-

  • मंदिर के प्रांगण में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से पूजा संपन्न की जाएगी। 
  • पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
  • पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे।

 

प्रसाद :-

  • पंचमेवा
  • ग्रह शनि से संबंधित दान वस्तुओं से युक्त एक छोटा पैकेट भिजवाया जाएगा उसी को सूर्यास्त से पहले किसी भी रविवार को बहते पानी में विसर्जित कर देना चाहिए।

Temple Details

Temple

नवग्रहों की तपस्थली

स्कंद पुराण के अनुसार नवग्रहों ने भी इस पावन स्थल पर आकर शिवलिंग स्थापित किए और तपस्या कर भगवान शिव से वरदान प्राप्त किए। उनके द्वारा स्थापित लिंगों के नाम हैं- नरादित्य, सोमेश्वर, मंगलेश्वर, बुधेश्वर, बृहस्पतीश्वर, शुक्रेश्वर, स्थावरेश्वर, मुनीश्वर, राहु-केतुऐश्वर।....जहां क्षिप्रा, क्षाता, और गुप्त सरस्वती नदियाँ मिलती हैं, उसे त्रिवेणी संगम कहते हैं। यह स्थान मोक्ष प्रदायक माना गया है। यहां स्नान, दान और स्थावरेश्वर महादेव के दर्शन से समस्त पापों का नाश होता है और शनि पीड़ा का शमन होता है। इसी कारण यह स्थान नवग्रह त्रिवेणी शनि मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ। 
उज्जैन के त्रिवेणी संगम पर ही राजा विक्रमादित्य ने भगवान शनिदेव और नवग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा करवाई और एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। आज भी यह स्थान भक्तों के लिए आस्था और शांति का केंद्र बना हुआ है। यहां शनि देव के साथ दाईं ओर श्री गणेश जी, बाईं ओर ढैय्या शनि, पीछे श्री बालाजी हनुमान विराजमान हैं।

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