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बुध ग्रह शांति पूजा
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Increase in positivity in life.

बुध ग्रह शांति पूजा

Wed 22 July 2026
Navgrah Shani Mandir,Ujjain Madhya Pradesh
Prasad Box
2500951(62% OFF)

Booking Closes in:

11Day
20H
38M
36S

Benefits

बुध ग्रह शांति पूजा के शुभ फल :

  •  बुध ग्रह द्वारा मिलने वाले नकारात्मक प्रभावों पर नियंत्रण। 
  •  बेहतर जीवन के लिए बुध की सकारात्मक शक्ति की प्राप्ति।
  • व्यापार, बुद्धि एवं संचार में वृद्धि। 
  • मिर्गी, अस्थमा जैसी बीमारियों और त्वचा संबंधी समस्याओं पर नियंत्रण।
  • शिक्षा में उन्नति।

Description

बुध ग्रह शांति पूजा

 

  • ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि, चतुराई, संचार, कुशाग्रता, उचित लेखन क्षमता का प्रतीक माना गया है। यदि जन्म कुंडली में बुध पीड़ित या दुर्बल हो तो जातक को तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बुध एक शुभ ग्रह है, लेकिन क्रूर ग्रह के संगम से यह अशुभ फल देता है। बुध की कृपा पाने और उससे जुड़े दोषों को दूर करेन के लिए बुध यंत्र की स्थापना, बुधवार का व्रत, बुधवार को भगवान विष्णु की पूजा आदि प्रमुख उपाय हैं। कुंडली में बुध की खराब स्थिति से त्वचा संबंधी विकार, शिक्षा में एकाग्रता की कमी और लेखन कार्य में परेशानी आती है।

 

हमारी सेवाएं 

 

  • मंदिर के प्रांगण में अनुभवी पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र पूजा संपन्न की जाएगी। 
  • पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
  • पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे

 

बुध ग्रह शांति पूजा संपन्न होने पर भेजा जायेगा यह प्रसाद

 

  • पंचमेवा 
  • बुध ग्रह के महाउपाय से जुड़ी वस्तुओं का एक छोटा पैकेट, जिसे सूर्यास्त के पूर्व किसी भी बुधवार को बहते पानी में विसर्जित कर देना है। 

इन अनुष्ठानों का उद्देश्य बुध को प्रसन्न करना, उसके अशुभ प्रभावों को दूर करना, भक्तों को बुद्धि, स्पष्टता और सफलता प्रदान करना है।

Temple Details

Temple

नवग्रहों की तपस्थली

स्कंद पुराण के अनुसार नवग्रहों ने भी इस पावन स्थल पर आकर शिवलिंग स्थापित किए और तपस्या कर भगवान शिव से वरदान प्राप्त किए। उनके द्वारा स्थापित लिंगों के नाम हैं- नरादित्य, सोमेश्वर, मंगलेश्वर, बुधेश्वर, बृहस्पतीश्वर, शुक्रेश्वर, स्थावरेश्वर, मुनीश्वर, राहु-केतुऐश्वर।....जहां क्षिप्रा, क्षाता, और गुप्त सरस्वती नदियाँ मिलती हैं, उसे त्रिवेणी संगम कहते हैं। यह स्थान मोक्ष प्रदायक माना गया है। यहां स्नान, दान और स्थावरेश्वर महादेव के दर्शन से समस्त पापों का नाश होता है और शनि पीड़ा का शमन होता है। इसी कारण यह स्थान नवग्रह त्रिवेणी शनि मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ। 
उज्जैन के त्रिवेणी संगम पर ही राजा विक्रमादित्य ने भगवान शनिदेव और नवग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा करवाई और एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। आज भी यह स्थान भक्तों के लिए आस्था और शांति का केंद्र बना हुआ है। यहां शनि देव के साथ दाईं ओर श्री गणेश जी, बाईं ओर ढैय्या शनि, पीछे श्री बालाजी हनुमान विराजमान हैं।

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Reviews

व्यस्त जीवनशैली के कारण मंदिर जाना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन MyJyotish की मदद से मैं घर बैठे ही पूजा में शामिल हो सका। यह अनुभव सुविधाजनक होने के साथ-साथ आध्यात्मिक रूप से भी बहुत संतोषजनक था।

ऑनलाइन पूजा को लेकर शुरुआत में मुझे थोड़ी शंका थी, लेकिन MyJyotish के साथ मेरा अनुभव बहुत सकारात्मक रहा। पूजा पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हुई और मैं पूरे समय उससे जुड़ा हुआ महसूस करता रहा।

MyJyotish ऑनलाइन पूजा बुक करने के लिए एक बेहतरीन प्लेटफ़ॉर्म है। मैंने घर बैठे ही पूजा में भाग लिया और पूरे अनुष्ठान के दौरान स्वयं को आध्यात्मिक रूप से जुड़ा हुआ महसूस किया। यह अनुभव बहुत सहज, सुविधाजनक और संतोषजनक रहा।

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