जीवन में किसी न किसी समय व्यक्ति को अपने विरोधियों का सामना अवश्य करना पड़ता है. उस समय जीवन के उन गुणों पर आगे बढ़ा बहुत आवश्यक हो जाता है जब इन चीजों से बचाव सहजा पूर्वक संभव हो पाए. आचार्य चाणक्य के अनुसार बताई गई बातों को अगर समझा जाए तो काफी हद तक ऎसी परिस्थितियों से बचाव भी संभव है. कहा जाता है कि हर किसी के जीवन में कोई न कोई दुश्मन होता है. शत्रुओं पर विजय पाने के लिए व्यक्ति में चतुराई का होना अति आवश्यक है. एक सफल व्यक्ति के दुश्मन अधिक होते हैं और वह हमेशा उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है. शत्रुओं को परास्त करने के लिए आचार्य ने विशेष उपाय बताए हैं. चाणक्य से जुड़े इन उपायों को अपनाकर कोई भी अपने शत्रु पर विजय प्राप्त कर सकता है. आचार्य चाणक्य ने अपने जीवन में कई ऐसे शास्त्रों की रचना की, जिनका अनुसरण करते हुए कई राजा-महाराजाओं ने दशकों तक राज किया.
नीतिशास्त्र से जानें कैसे शत्रुओं को परास्त किया जाए
क्रोध पर नियंत्रण और उचित रणनीति
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जब कोई परेशानी या आपदा जीवन में दुश्मन के रुप में आती है तो जरुरी है की उस समय उचित रणनीति से काम लिया जाए. अगर व्यक्ति ज्यादा ताकतवर हो तो पीछे हटना ही सबसे अच्छा विकल्प है. इसके बाद आप एक मजबूत रणनीति के साथ सही समय का इंतजार करते हुए मौका मिलते ही पूरी तैयारी के साथ अपने दुश्मन पर दोबारा हमला करना ही उचित नीति कही जाती है. अगर हम ठीक से काम करेंगे तो निश्चित रूप से हम दुश्मन को परास्त कर पाएंगे. व्यर्थ के क्रोध से केवल शक्ति का व्यय होगा शत्रु का नहीं.
स्थिति पर नजर बनाए रखना
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जब भी परेशानि का सामना हो तो अपने शत्रु को कभी भी अपने से कमजोर नहीं समझना चाहिए. शत्रु की हर गतिविधि पर हमेशा नजर रखनी चाहिए. सभी कमजोरियों का पता लगाते रहना चाहिए क्योंकि इन्हीं कमजोरियों के बल पर शत्रु को आसानी से परास्त किया जा सकता है.
आचार्य चाणक्य के अनुसार बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो एक सफल व्यक्ति से ईर्ष्या करते हैं. हम इनमें से कुछ लोगों को जानते हैं, लेकिन कुछ अनजाने दुश्मन भी हैं. जो चुपके से हमला करते हैं. ऐसे लोग सबसे घातक और हानिकारक सिद्ध होते हैं. इसलिए कभी भी किसी पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए.