अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शुभ कार्य किए जाते हैं जिनसे अक्षय फल की प्राप्ति होती है। वर्षभर शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि शुभ मानी जाती है परन्तु इस दिन यानी की वैशाख माह की तृतीया तिथि को स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में माना गया है। अक्षय तृतीया को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी या घर, भूखंड, वाहन आदि की खरीददारी से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं।
विध्यांचल मंदिर हिन्दुओं के प्रमुख देवी स्थलों में से एक है। यह मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के मिर्जापुर स्थान के पास है। इस स्थान का प्राचीनकाल से ही पुराणों में बहुत महत्व है। पुराणों के विंध्य महात्म्य में इस बात का उल्लेख है कि देवी के 51 शक्तिपीठों में से मां विंध्यवासिनी का शक्तिपीठ एक पूर्णपीठ है। मां विंध्यवासिनी एक जागृत शक्तिपीठ है जिसका अस्तित्व सृष्टि आरंभ होने से पूर्व और प्रलय के बाद भी रहेगा। यहां देवी के 3 रूपों के दर्शन करने का सौभाग्य भक्तों को प्राप्त होता है। त्रिकोण यंत्र पर स्थित इस मंदिर की विंध्यवासिनी देवी प्रसिद्ध रूप से महाकाली ,महालक्ष्मी तथा महासरस्वती का रूप धारण करती हैं। यहां पूजा करने वाले भक्तों को त्रिदेवियों की अनेकों सिद्धियों की प्राप्ति होती है। इन देवियों के आशीर्वाद से उपासकों को कभी भी धन ,बल व विद्या की कमी नहीं होती। देवी सदैव अपने भक्तों के कष्टों को दूर करने के लिए तत्पर रहती हैं।
यहाँ देवी के चार श्रृंगार किए जाते हैं :
1.मंगल आरती या प्रातः आरती - 4:00 am से 5:00 am
2.राजश्री आरती या मध्यान्ह आरती - 12:00 pm से 1:30 pm
3.छोटी आरती या संध्या आरती - 7:15 pm से 8:15 pm
4.बड़ी आरती या शयन- 9:30 pm से 10:30 pm
अक्षय तृतीया के दिन इन श्रृंगारों का हिस्सा बनने से अटके हुए कार्य बनने लगते हैं। घर में सुख शांति व धन का लाभ होता है। इन आशीर्वादों के हक़दार आप भी बन सकते हैं। अगर चाहते हैं देवी की आराधना का उच्चतम फल तो यह पूजा अवश्य कराएं।
हमारी सेवाएं-
पंडित जी माँ का श्रृंगार करने से पहले कॉल करके आपको संकल्प कराएंगे। प्रसाद भी भिजवाया जाएगा।
पूजा का प्रसाद :
- माँ के श्रृंगार की रोली
- माँ के श्रृंगार की मोली
- श्रृंगार का भोग - पंचमेवा
पूजा का प्रसाद लॉकडाउन के बाद भिजवाया जाएगा।