नवरात्रि के पावन दिनों में तंत्र साधना (दुर्गाष्टमी को पूजन किया जायेगा) का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवधि में मंत्रों का जाप करने से देवी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। नवरात्रि के समय दस महाविद्याओं की आराधना की जाती है, जिनमें मां बगलामुखी का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं। मां को पीला रंग बेहद प्रिय है, इसी कारण उन्हें देवी पीताम्बरा भी कहा जाता है। उनकी प्रतिमा में भी वे सदैव पीले वस्त्र धारण किए रहती हैं, जो उनके विशेष स्वरूप और शक्ति का प्रतीक है।
- यदि आप कार्य में बाधाओं से परेशान हैं।
- बनते बनते काम बिगड़ जाते हैं।
- रोग पीछा नहीं छोड़ रहे हैं।
- शत्रुओं से घिरे हुए हैं।
ऐसे में शास्त्र दस महाविद्याओं में प्रचंड वडवानल सी बाधाओं को नष्ट करने वाली मां बगलामुखी की उपासना और पूजा करने के लिए निर्देश देते हैं।
कहतें है की शारदीय नवरात्रि के समय माँ बगलामुखी के मंत्रों का जाप करने से घर - परिवार में सम्पन्नता आती है। यह शत्रुओं को नष्ट करने वाली देवी के रूप में जानी जाती है। जो कोई भी इनके आशीर्वाद को प्राप्त कर लेता है , उसे फिर किसी भी प्रकार की मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता है। देवी उसके मार्ग में आ रही समस्त बाधाओं का नाशकर , उसके सुख - समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती है।
हमारी सेवाएं :-
- मंदिर के प्रांगण में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से नवरात्रि पूजा संपन्न की जाएगी।
- पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
- पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे
प्रसाद-
- पंचमेवा
- पीला वस्त्र
- मौली(हाथ में बांधने के लिए)
- बगलामुखी यंत्र