महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित वह परम पावन रात्रि है, जब स्वयं देवाधिदेव भोलेनाथ अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। इस दिव्य अवसर पर किया गया रुद्री पाठ और चार प्रहर रात्रि महाभिषेक शिव कृपा को शीघ्र प्राप्त करने का अत्यंत प्रभावशाली उपाय माना गया है।
रुद्री पाठ, जिसमें भगवान शिव के रौद्र एवं करुण दोनों रूपों की उपासना की जाती है। यह पाठ नकारात्मक शक्तियों, ग्रह बाधाओं और जीवन के समस्त कष्टों के शमन के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इसके प्रभाव से सभी ग्रह दोष शांत होते हैं, अकाल मृत्यु, रोग और भय से रक्षा होती है। जीवन में सुख, शांति और स्थिरता आती है, इसके साथ ही शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- चार प्रहर रात्रि महाभिषेक का महत्व
महाशिवरात्रि की रात्रि चार प्रहरों में विभाजित होती है। प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव का अलग-अलग द्रव्यों से अभिषेक करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। यह साधना पूर्ण रात्रि जागरण और शिव तत्त्व से जुड़ने का श्रेष्ठ माध्यम है।
- महाशिवरात्रि चार प्रहर मुहूर्त
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - 06:11 पी एम से 09:23 पी एम
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - 09:23 पी एम से 12:35 ए एम, फरवरी 16
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 12:35 ए एम से 03:47 ए एम, फरवरी 16
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 03:47 ए एम से 06:59 ए एम, फरवरी 16
हमारी सेवाएं :-
- काशी तीर्थ क्षेत्र में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से रुद्री पाठ एवं चार प्रहर रात्रि महाभिषेक कराया जाएगा।
- पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
- पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे।
प्रसाद : -
- रुद्राक्ष
- सूखा भोग
- बाबा का भस्म
- काला धागा ( हाथ में बांधने हेतु )