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गंगा सप्तमी पर दीपदान और गंगा आरती, काशी खंड
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Peace for Ancestors

गंगा सप्तमी पर दीपदान और गंगा आरती, काशी खंड

Thu 23 April 2026
Panch Ganga, Kashi khand
1500751(50% OFF)

Booking Closes in:

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Puja Benefits

 

  • पापों का नाश
  • पूर्वजों को शांति
  • नकारात्मकता से मुक्ति 
  • जीवन में शांति

Description

  • गंगा सप्तमी क्या है?

गंगा सप्तमी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन पर्व है, जिसे मां गंगा के पृथ्वी पर पुनः प्रकट होने के दिन के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा पुनः धरती पर अवतरित हुई थीं। यह दिन विशेष रूप से गंगा स्नान, दान और पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। गंगा को “मोक्षदायिनी” और “पाप नाशिनी” कहा गया है, इसलिए गंगा सप्तमी पर उनकी पूजा करने से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं और आत्मा की शुद्धि होती है। इसी को देखते हुए माय ज्योतिष द्वारा काशी खंड के पंच गंगा घाट पर दीपदान और गंगा आरती का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही इस दिन मां गंगा को पीली चुनरी भी अर्पित की जाएगी। 
 

  • गंगा सप्तमी की कथा 

कथा के अनुसार कहा जाता है गंगा दशहरा के पर्व पर मां गंगा धरती पर अवतरित हुईं और शिवजी जटाओं से निकलने के बाद भी वेग काफी अधिक था और मां गंगा के वेग के कारण जह्नु ऋषि का आश्रम बह गया, जिसके कारण ऋषि जह्नु ने क्रोध में आकर पूरी गंगा नदी को पी लिया। फिर देवताओं के आग्रह के बाद ऋषि ने अपने कान (कर्ण) से गंगा को पुनः बाहर निकाला। कहा जाता है कि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि वही तिथि है, जब मां गंगा फिर से धरती पर अवतरित हुईं। तो सोचिए जरा गंगा सप्तमी के पावन पर्व पर मां गंगा का पूजन कितना फलदाई होगा।

 

हमारी सेवाएं :

  • मंदिर के प्रांगण में अनुभवी पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से दीपदान और गंगा आरती पूजा संपन्न की जाएगी। 
  • पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
  • पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे

 

Temple Details

Temple

पंचगंगा घाट का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व गहरा है और यह श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रातःकालीन गंगा आरती देखने हेतु एक लोकप्रिय स्थल है। यह भावपूर्ण 'आरती' देवी गंगा की स्तुति हेतु की जाती है और घाट के दिव्य उद्देश्य पर प्रकाश डालती है। आरती करते समय, पुजारी केंद्रीय मंच पर आते हैं और कई अत्यंत विस्तृत अनुष्ठान करते हैं, जिनमें तेल के दीपक, पाठ और अर्पण शामिल हैं, जो इसे पूरी तरह से मनोरंजक और आध्यात्मिक रूप से परिपूर्ण बनाते हैं।

पंचगंगा घाट वह स्थान है जहाँ पाँच पवित्र नदियाँ मिलती हैं कहा जाता है कि अन्य पाँच या चार नदियाँ धरती माता में विलीन हो गई हैं। एक और रोचक तथ्य यह है कि पंचगंगा घाट का उपयोग वेदांत रामानंद के शिक्षण स्थल के रूप में किया जाता था, जो भारत के सबसे प्रसिद्ध संतों में से एक, कबीर के गुरु थे। ऐसा भी कहा जाता है कि महान संत कवि तुलसीदास ने इसी घाट पर 'विनय पत्रिका' लिखी थी।

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