कामाख्या देवी मंदिर शक्तिपीठ कहलाता है। यहां पर माता सती का योनि भाग गिरा था। यहां पर मां की कोई प्रतिमा स्थापित नहीं हैं। बल्कि यहां मां के योनि स्वरूप कोे ही पूजा जाता है। इसलिए यहां पर पूजा करवाने का विशेष महत्व है। जैसे नवरात्रों में मां दुर्गा के नौ रुपों की पूजा की जाती है, उसी प्रकार इन गुप्त नवरात्रों में मां की दस महाविद्याओं की उपासना की जाती है। नवरात्रों के दौरान दुर्गा सप्तशती और देवी का पाठ करने से शत्रुओं का नाश होता है, तथा भक्त का जीवन हर प्रकार की बाधा से मुक्त हो जाता है। और मां भक्त की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। आप भी इन गुप्त नवरात्रों में मां कामाख्या देवी की पूजा करवा कर मां की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
हमारी सेवाएं :
पंडित जी के द्वारा आपके नाम से दुर्गा सप्तशती का पाठ मां कामाख्या के मंदिर में किया जाएगा। सप्तशती के पाठ के बाद क्षमापन स्त्रोत का पाठ भी किया जाएगा। क्षमापन पाठ त्रुटि दूर करने के लिए किया जाता है। पाठ के बाद हवन करवाया जाएगा। पंडित जी के द्वारा कॉल पर आपको संकल्प करवाया जाएगा। पूजा के बाद प्रसाद भिजवाया जाएगा।
प्रसाद-
- लाल कपड़ा
- पंचमेवा का प्रसाद
- माता की मौली
- कामाख्या देवी की फोटो