गुप्त नवरात्र क्या है?
गुप्त नवरात्रि वर्ष में 2 बार आती हैं, पहली माघ महीने में और दूसरी आषाढ़ माह में। ये गुप्त नवरात्र साधना, तंत्र-मंत्र और गुप्त उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जहां चैत्र और शारदीय नवरात्र सार्वजनिक रूप से मनाए जाते हैं, वहीं गुप्त नवरात्र में साधक अपनी साधना को गोपनीय रखते हुए शक्ति आराधना करते हैं। इस काल में दस महाविद्याओं की उपासना का विशेष विधान है और यह समय सिद्धि, साधना और आत्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
- गुप्त नवरात्र में माँ बगलामुखी मंत्र जाप और अनुष्ठान का महत्व
दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या माँ बगलामुखी को स्तंभन शक्ति की देवी कहा गया है। माँ बगलामुखी शत्रुओं की वाणी, बुद्धि और नकारात्मक शक्तियों को शांत करने वाली देवी हैं। गुप्त नवरात्र के दौरान माँ बगलामुखी का मंत्र जाप और अनुष्ठान विशेष फलदायी होता है, क्योंकि इस समय की गई साधना शीघ्र सिद्धि देने वाली मानी जाती है। हरिद्वार जैसी पवित्र नगरी में, गंगा तट के समीप किया गया माँ बगलामुखी अनुष्ठान साधना की शक्ति को कई गुना बढ़ा देता है।
- गुप्त नवरात्र की अष्टमी तिथि को यानी कि 26 जनवरी को मंत्र जाप, हवन और विधिवत पूजा की जाएगी।
गुप्त नवरात्र के पावन अवसर पर हरिद्वार में आयोजित माँ बगलामुखी मंत्र जाप और अनुष्ठान, उन सभी श्रद्धालुओं और साधकों के लिए एक विशेष अवसर है जो जीवन की बाधाओं से मुक्ति और शक्ति साधना के माध्यम से सफलता प्राप्त करना चाहते हैं। माता की कृपा से साधक के जीवन में सुरक्षा, शांति और विजय का मार्ग प्रशस्त होता है।
हमारी सेवाएं :-
- मंदिर के प्रांगण में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से नवरात्रि पूजा संपन्न की जाएगी।
- पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
- पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे
प्रसाद
- पंचमेवा
- पीला वस्त्र
- मौली (हाथ में बांधने के लिए)