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गुरु ग्रह शांति पूजा
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Stability In Life

गुरु ग्रह शांति पूजा

Thu 20 August 2026
Navgrah Shani Mandir, Ujjain Madhya Pradesh
Prasad Box
1500901(40% OFF)

Booking Closes in:

03Day
13H
44M
37S

Benefits

  • गुरु ग्रह शांति पूजा  के लाभ
  • ज्ञान में वृद्धि 
  • सही मार्गदर्शन
  • जीवन में स्थिरता 
  • व्यवसाय में तरक्की 
  • पारिवारिक जीवन में खुशहाली 

Description

  • गुरु बृहस्पति की पूजा क्यों है जरूरी?

गुरु बृहस्पति ग्रह को ज्ञान और धन का प्रतीक माना जाता है। ग्रंथो में बृहस्पति को देवगुरु का स्थान प्राप्त है। इसे सबसे शुभ ग्रह में माना जाता है। बृहस्पति ग्रह ज्ञान, धन, सम्मान, प्रसिद्धि, धार्मिक जीवन, अच्छे पारिवारिक जीवन, योग्य संतान, स्त्रियों की कुंडली में पति और रोग मुक्त जीवन एवं आध्यात्मिक ऊंचाइयों को दर्शाता है। बृहस्पति यदि दुर्बल हो तो यह चिंता का कारण हो सकता है और उपर्युक्त समस्याएं उनके जीवन में उत्पन्न हो सकती हैं। 

 

  • गुरु बृहस्पति का कमजोर होने से क्या होता है?

यदि किसी की     कुंडली में गुरु कमजोर हो तो,  ज्ञान की कमी, लिवर में खराबी,  धन में कमी, गुरुजनों की कमी, बड़ों के मार्गदर्शन में कमी,  मान सम्मान में कमी और स्त्रियों को पति से दुख मिल सकता है। इसके अलावा गुरु का ज्ञान ना मिलने की वजह से जीवन में अंधकार की स्थिति पैदा होती है। 

 

 

  • गुरु ग्रह शांति पूजा 

गुरुदेव बृहस्पति विद्या और बुद्धि के कारक ग्रह हैं। यह जीवन में सकारात्मकता और सकारात्मक प्रभाव लेकर आते हैं। कमजोर बृहस्पति वाले लोगों को जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अगर आप प्रसिद्ध मंदिर में विधि विधान के साथ पूजा गुरु शांति पूजा करवाते हैं, तो आपके जीवन से गुरु के कारण आने वाली समस्याएं खत्म हो सकती हैं।

 

हमारी सेवाए :

  • मंदिर के प्रांगण में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से पूजा संपन्न की जाएगी। 
  • पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
  • पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे।

 

प्रसाद :

  • पंचमेवा

 

Temple Details

Temple

नवग्रहों की तपस्थली
स्कंद पुराण के अनुसार नवग्रहों ने भी इस पावन स्थल पर आकर शिवलिंग स्थापित किए और तपस्या कर भगवान शिव से वरदान प्राप्त किए। उनके द्वारा स्थापित लिंगों के नाम हैं- नरादित्य, सोमेश्वर, मंगलेश्वर, बुधेश्वर, बृहस्पतीश्वर, शुक्रेश्वर, स्थावरेश्वर, मुनीश्वर, राहु-केतुऐश्वर।....

जहां क्षिप्रा, क्षाता, और गुप्त सरस्वती नदियाँ मिलती हैं, उसे त्रिवेणी संगम कहते हैं। यह स्थान मोक्ष प्रदायक माना गया है। यहां स्नान, दान और स्थावरेश्वर महादेव के दर्शन से समस्त पापों का नाश होता है और शनि पीड़ा का शमन होता है। इसी कारण यह स्थान नवग्रह त्रिवेणी शनि मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ। 
उज्जैन के त्रिवेणी संगम पर ही राजा विक्रमादित्य ने भगवान शनिदेव और नवग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा करवाई और एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। आज भी यह स्थान भक्तों के लिए आस्था और शांति का केंद्र बना हुआ है। यहां शनि देव के साथ दाईं ओर श्री गणेश जी, बाईं ओर ढैय्या शनि, पीछे श्री बालाजी हनुमान विराजमान हैं।

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Reviews

व्यस्त जीवनशैली के कारण मंदिर जाना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन MyJyotish की मदद से मैं घर बैठे ही पूजा में शामिल हो सका। यह अनुभव सुविधाजनक होने के साथ-साथ आध्यात्मिक रूप से भी बहुत संतोषजनक था।

ऑनलाइन पूजा को लेकर शुरुआत में मुझे थोड़ी शंका थी, लेकिन MyJyotish के साथ मेरा अनुभव बहुत सकारात्मक रहा। पूजा पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हुई और मैं पूरे समय उससे जुड़ा हुआ महसूस करता रहा।

MyJyotish ऑनलाइन पूजा बुक करने के लिए एक बेहतरीन प्लेटफ़ॉर्म है। मैंने घर बैठे ही पूजा में भाग लिया और पूरे अनुष्ठान के दौरान स्वयं को आध्यात्मिक रूप से जुड़ा हुआ महसूस किया। यह अनुभव बहुत सहज, सुविधाजनक और संतोषजनक रहा।

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