माँ चामुंडा भक्तों का उद्धार करने वाली देवी के रूप में जानी जाती है। उनका प्रसिद्ध चामुंडा मंदिर हिमाचल प्रदेश राज्य में स्थित है। देवी चामुंडा का रूप को काली को समर्पित माना जाता है। अर्थात वह रूप से भयावय परन्तु भक्तों की कामनाओं को पूर्ण करने वाली देवी है। देवी चामुंडा का मंदिर ,देवी सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है। उन्हें सिद्धिदात्री के रूप में भी जाना जाता है। वह भक्तों के दुखों का विनाशकर उन्हें जगत के समस्त सुख प्रदान करती है। वह धर्म की रक्षक अर्थात इस चरा - चर जगत की संरक्षक के रूप में भी जानी जाती है।
दुर्गासप्तशती के पाठ विभिन्न प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है। यह पाठ अत्यंत ही लाभप्रद माना गया है। इसमें 13 अध्याय है जिससे समस्त चिंताओं का नाश होता है। इसके पाठ से अदालती दिक्कतों से मुक्ति प्राप्त होती है। इस पाठ से देवी दुर्गा प्रसन्न होती है तथा साधकों की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस पाठ का उच्चारण धीमे स्वर में किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार यह पाठ केवल मन में या होंठ हिलाकर किया जाना चाहिए। तेज आवाज़ में किए जाने पर उसका महत्व नहीं रहता।
माँ चामुंडा को संहार की देवी के रूप में जाना जाता है। वह अधर्म की विनाशक है और सदैव धर्म की स्थापना का महत्व संसार को सिखाती आई है। यदि कोई व्यक्ति कठिन परिश्रमों के बाद भी क़ानूनी लड़ाई में पराजित होकर अपनी इच्छानुसार जीवन व्यतीत करने में असफल है तो यह पूजा उसकी सहायता के लिए ही बनी है। इस पूजा के माध्यम से वह अपने सफलता के मार्ग के बीच आ रही रुकावटों का निवारण कर सुखद जीवन की ओर प्रस्थान कर सकेगा।
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