फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि को बुराई पर अच्छाई की जीत का विजय का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, प्रह्लाद की बुआ यानी कि होलिका को ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त था वो कभी भी अग्नि से नहीं जलेगी। फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि पर वह भक्त प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ जाती है, जिसके बाद प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं होता, लेकिन होलिक जलकर खाक हो जाती है। इसलिए कहा जाता है कि बुराई भले ही कितनी भी ताकतवर क्यों ना हो, लेकिन अच्छाई के समक्ष अधिक नहीं टिक पाती है।
जिस प्रकार से दैवीय शक्ति ने भक्त प्राह्लाद की रक्षा की थी, ठीक इसी प्रकार से कहा जाता है होली के दौरान दैवीय ऊर्जा अधिक होती है। इसी को देखते हुए माय ज्योतिष होलिक दहन के पावन पर्व पर काशी के प्रसिद्ध भद्रकाली मंदिर में चढ़ावे का आयोजन करवा रहा है। जिसमें आप घर बैठे मां काली को पंच महाचढ़ावा, जिसमें लौंग,कपूर, पीली सरसों, गुड़, काला तिल आदि शामिल है, चढ़ा सकते हैं।
हमारी सेवाए :
- मंदिर के प्रांगण में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से पूजा संपन्न की जाएगी।
- पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
- पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे।