कार्तिक पूर्णिमा बहुत ही शुभ दिन होता है। इस दिन भगवान विष्णु मत्स्य अवतार में प्रकट हुए थे और साथ ही इस दिन को तुलसी के अवतार वृंदा की जन्म तिथि के रूप में भी जाना जाता है। शिव के पुत्र और युद्ध के देवता कार्तिकेय का जन्म भी इसी दिन हुआ था। राधा और कृष्ण के भक्तों का मानना है कि कार्तिक पूर्णिमा पर देवताओं ने रास नृत्य किया था। माना जाता है की कार्तिक पूर्णिमा पर दीप दान करना बहुत फलदायक होता है। इस दिन वैदिक मंत्रों और भजनों का पाठ करना भी बहुत शुभ माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा का दिन तुलसी विवाह के उत्सव का भी प्रतीक है। इस दिन, भगवान विष्णु के साथ देवी वृंदा (तुलसी का पौधा) का विवाह समारोह धूमधाम से मनाया जाता है।
- क्यों आवश्यक है कार्तिक माह में दीप - दान ?
- यह माह देवी - देवताओं के उत्सव के रुप में जाना जाता है।
- इस दिन देवताओं का आशीर्वाद शीघ्र ही प्राप्त हो जाता है।
- कार्तिक पूर्णिमा का पूजन पूर्वजों का आशीष प्राप्त करने में सहायक होता है। यह दिन विशेष रूप से देव - दीपावली के नाम से जाना जाता है।
- कार्तिक पूर्णिमा के दिन किया अखंड दीप का दान धन, यश एवं कीर्ति का सुख प्रदान करता है। यह पूजन दस महायज्ञों के समान माना जाता है। यह माह उत्तम माह माना जाता है क्योंकि
स्कन्द पुराण के अनुसार भगवान कार्तिकेय ने इसी माह तारकासुर का वध किया था जिसके कारण ही यह माह कार्तिक माह कहलाया।
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