महाकाली के अनुष्ठान का महत्व :-
माँ काली की आराधना करने वाले भक्तों को नकारात्मक ऊर्जा से कोई भय नहीं होता है। कालिका की उपासना से जीवन में सुख, शांति, शक्ति, विद्या की प्राप्ति होती हैं। काली पूजा से हर तरह की अशुद्धियाँ खत्म हो जाती हैं। देवी काली की शरण में आने के बाद भक्त के समस्त राग, द्वेष, विघ्न आदि भस्म हो जाते हैं। माँ काली शक्ति व सम्प्रदाय की प्रमुख देवी है। जिस प्रकार संहार के अधिपति महादेव शिव है उसी प्रकार संहार की अधिष्ठात्री महाकाली है। इनकी पूजा से भय का नाश होता है ,आरोग्य शरीर का आशीर्वाद प्राप्त होता है। स्वयं की रक्षा व शत्रुओं पर नियंत्रण रहता है।
कोलकाता का कालीघाटी मंदिर देवी सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है। माँ की प्रतिमा में जिव्हा सोने की है जो की बाहर तक निकली हुई है काली मंदिर में देवी काली के प्रचंड रूप की प्रतिमा स्थापित है। इस प्रतिमा में देवी काली भगवान शिव की छाती पर पैर रखी हुई है।उनके गले में नरमुंडो की माला है उनके हाथ में कुल्हाड़ी और उनकी कमर में भी कुछ नरमुंड बंधे हुए है। देवी के इस रूप की आरधना से जीवन का अंधकार दूर हो जाता है तथा सफलता के मार्ग सुदर्शित होतें है। देवी अनंत काल तक स्वयं अपने भक्तों की रक्षा करती है। यदि आपके काम नहीं बन रहें है ,नौकरी में कठिन संघर्ष के बाद भी सफलता प्राप्त नही हो रही है तो यह अनुष्ठान अवश्य कराएं। इसके द्वारा प्राप्त हुए माँ काली के आशीर्वाद से आप अवश्य ही सुख -समृद्धि के भागीदार बनेंगे।
हमारी सेवाएं :-
अनुष्ठान से पहले हमारे युगान्तरित पंडित जी द्वारा फ़ोन पर आपको संकल्प करवाया जाएगा। अनुष्ठान संपन्न होने के बाद प्रसाद भी भिजवाया जाएगा ।
पूजा का प्रसाद :-
- महाकाली यंत्र (उर्जित )
- इलायची (उर्जित)