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सप्तमी विशेष महाअनुष्ठान: माँ भद्रकाली चंडी पाठ एवं महानिशा पूजा
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सप्तमी विशेष महाअनुष्ठान: माँ भद्रकाली चंडी पाठ एवं महानिशा पूजा

Wed 25 March 2026
Durga Kund Temple, Kashi
35001500(57% OFF)

Booking Closes in:

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Benefits

  • बाधाओं और संकटों से मुक्ति
  • बुरी नजर या तंत्र बाधा से सुरक्षा
  • शत्रु बाधा और कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय 
  • मानसिक भय, तनाव और असुरक्षा से राहत 
  • धन, शक्ति और साहस की प्राप्ति

Description

 

  • भद्रकाली मॉं  

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां दुर्गा के सभी अवतारों में माँ काली सबसे उग्र और सबसे शक्तिशाली शक्ति हैं। कहा जाता है कि जीवन से परेशानियों और नकारात्मकता को पूरी तरह से खत्म करने के लिए काली पूजा अत्यंत लाभदायक होती है। नवरात्र के समय खासतौर पर यदि मां भद्रकाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है तो आपको कई नकारात्मक ऊर्जाओं से छुटकारा मिल सकता है। इसी को देखते हुए माय ज्योतिष नवरात्रि के पावन पर्व पर काशी के दुर्गा कुंड मंदिर में भद्रकाली चंडी पाठ एवं महानिशा पूजा का आयोजन करवा रहा है। जिसमें आप घर बैठे पूजा में भाग ले सकते हैं।  

  • भद्रकाली चंडी पाठ एवं महानिशा पूजा का महत्व 

यह पूजा नकारात्मक शक्तियों, बाधाओं और शत्रुओं से रक्षा करने के लिए अत्यंत प्रभावी मानी जाती है। माँ भद्रकाली को संकटों का नाश करने वाली और अपने भक्तों की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। जब चंडी पाठ के साथ महानिशा पूजा की जाती है, तो यह साधना व्यक्ति के जीवन में छिपी हुई समस्याओं, भय और अशुभ प्रभावों को दूर करने में सहायक होती है।
भद्रकाली चंडी पाठ एवं महानिशा पूजा देवी शक्ति की अत्यंत प्रभावशाली साधनाओं में से मानी जाती है। यह पूजा माँ भद्रकाली और चंडी के उग्र और रक्षक स्वरूप को प्रसन्न करने के लिए की जाती है। इसमें दुर्गा सप्तशती के चंडी पाठ के साथ विशेष मंत्रों और विधियों से रात्रि में साधना की जाती है, जिसे महानिशा पूजा कहा जाता है। 

 

हमारी सेवाएं :

  • मंदिर के प्रांगण में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से नवरात्रि की दुर्गाष्टमी के दिन पूजा संपन्न की जाएगी। 
  • पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
  • पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे

प्रसाद:

  • सूखा प्रसाद
  • रक्षा सूत्र
  • कुमकुम

Temple Details

Temple

काशी के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिने जाने वाले श्री दुर्गा कुंड मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड में भी मिलता है। 17वीं शताब्दी में रानी भवानी द्वारा इसका जीर्णोद्धार कराया गया था। मंदिर परिसर में स्थित तालाब, जिसे दुर्गा कुंड कहा जाता है, श्रद्धालुओं के लिए पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि शुंभ और निशुंभ का वध करने के बाद देवी दुर्गा ने यहीं विश्राम किया था और वे अपने कुष्मांडा स्वरूप में यहाँ विराजमान हैं। शारदीय नवरात्रि के समय देशभर से लाखों भक्त यहाँ पहुँचते हैं और देवी के चरणों में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद पाते हैं।

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Reviews

व्यस्त जीवनशैली के कारण मंदिर जाना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन MyJyotish की मदद से मैं घर बैठे ही पूजा में शामिल हो सका। यह अनुभव सुविधाजनक होने के साथ-साथ आध्यात्मिक रूप से भी बहुत संतोषजनक था।

MyJyotish ऑनलाइन पूजा बुक करने के लिए एक बेहतरीन प्लेटफ़ॉर्म है। मैंने घर बैठे ही पूजा में भाग लिया और पूरे अनुष्ठान के दौरान स्वयं को आध्यात्मिक रूप से जुड़ा हुआ महसूस किया। यह अनुभव बहुत सहज, सुविधाजनक और संतोषजनक रहा।

ऑनलाइन पूजा को लेकर शुरुआत में मुझे थोड़ी शंका थी, लेकिन MyJyotish के साथ मेरा अनुभव बहुत सकारात्मक रहा। पूजा पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हुई और मैं पूरे समय उससे जुड़ा हुआ महसूस करता रहा।

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