पितृ पक्ष में भरणी नक्षत्र के मौके पर माय ज्योतिष द्वारा पावन हरिद्वार धाम में गंगा तट पर महा भरणी श्राद्ध विशेष अनुष्ठान का भव्य आयोजन किया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, भरणी नक्षत्र के स्वामी यमराज हैं। इसलिए पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाली चतुर्थमी / पंचमी तिथि पर जब भरणी नक्षत्र आता है, तो उसे 'महा भरणी श्राद्ध' कहा जाता है। इस दिन किया गया श्राद्ध और तर्पण गया जी में किए गए श्राद्ध के समान फलदायी माना जाता है।
क्या है महा भरणी श्राद्ध विशेष अनुष्ठान?
- 'महा भरणी श्राद्ध अनुष्ठान' हरिद्वार में पावन गंगा नदी के तट पर आयोजित होने वाली एक अत्यंत प्रभावशाली पूजन प्रक्रिया है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, भरणी नक्षत्र में पितरों के निमित्त किया गया श्राद्ध उनकी आत्मा को यमलोक की बाधाओं से मुक्त कराकर परम तृप्ति और सद्गति प्रदान करता है।
अनुष्ठान में होने प्रमुख पूजन विवरण
- मां गंगा की पूजा-अर्चना और आरती।
- दिवंगत पितरों के नाम व गोत्र का उच्चारण कर संकल्प।
- काले तिल, जल और कुश से तर्पण।
- पिंड अर्पित कर पितरों का आह्वान और तृप्ति।
- अन्न, फल और दान का अर्पण।
- यम बाधा दूर करने के लिए वैदिक मंत्रों का जप।
- शाम के समय दीपदान।
- परिवार में समृद्धि के लिए प्रार्थना।
किन लोगों को यह अनुष्ठान विशेष रूप से करवाना चाहिए?
- जो पूर्वजों के प्रति विशेष श्रद्धा प्रकट करना चाहते हैं।
- जिनकी कुंडली में पितृ दोष हो।
- जो गया श्राद्ध के समान पुण्य फल प्राप्त करना चाहते हों।
- जो वंश वृद्धि की मंगलकामना करते हैं।
विशेष पितृ संकल्प
“हमारे दिवंगत पितरों की शांति, तृप्ति एवं सद्गति की मंगलकामना तथा उनके आशीर्वाद से परिवार में सुख, शांति, समृद्धि एवं मंगल बना रहे—इसी शुभ भावना से यह महा भरणी श्राद्ध अनुष्ठान श्रद्धापूर्वक समर्पित है।”
हरिद्वार गंगा तट पर पितृ स्मरण
ॐ पितृभ्यो नमः • हर हर गंगे
हमारी सेवाएं
- हरिद्वार के घाट में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से श्राद्ध पूजा संपन्न की जाएगी।
- पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
- पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे।