पितृ पक्ष में नवमी तिथि के भावुक अवसर पर माय ज्योतिष द्वारा हरिद्वार धाम में गंगा तट पर मातृ नवमी श्राद्ध विशेष अनुष्ठान का दिव्य आयोजन किया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, मातृ नवमी की तिथि दिवंगत माता, दादी, नानी, सास और मातृ पक्ष की समस्त पूर्वज महिलाओं (पितरों) को समर्पित होती है। इस दिन किया गया श्राद्ध और तर्पण मातृ ऋण से मुक्ति दिलाने वाला और परिवार में सुख-शांति लाने वाला माना गया है।
क्या है मातृ नवमी श्राद्ध अनुष्ठान?
- 'मातृ नवमी श्राद्ध अनुष्ठान' पावन हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर आयोजित होने वाली एक बेहद पवित्र पूजन प्रक्रिया है। हिंदू परंपरा में मातृ पक्ष के पूर्वजों का स्थान सर्वोपरि है। इससे महिला पूर्वजों की आत्माओं को शांति मिलती है।
अनुष्ठान में शामिल प्रमुख पूजन विवरण
- पूर्वज महिलाओं के नाम-गोत्र का उच्चारण कर संकल्प।
- मां गंगा की विशेष आराधना।
- कुश, काले तिल और गंगाजल से तर्पण।
- विधि-विधान से निर्मित पिंड अर्पित करना।
- अन्न, फल और दान अर्पण।
- वैदिक मंत्रों का जाप।
- शाम के समय मातृ शक्तियों के लिए भव्य दीपदान।
- परिवार में सुख, शांति बनी रहने की प्रार्थना।
किन लोगों को यह अनुष्ठान विशेष रूप से करवाना चाहिए?
- जो अपनी दिवंगत माता के निमित्त तर्पण करवाना चाहते हैं।
- जो पितरों की आत्मा की शांति की कामना करते हैं।
- जिनकी माता का निधन किसी भी माह की नवमी तिथि को हुआ हो।
- जो परिवार की सुख-समृद्धि की मंगलकामना करते हैं।
हमारी सेवाएं
- हरिद्वार के घाट में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से श्राद्ध पूजा संपन्न की जाएगी।
- पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
- पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे।