नवरात्र में क्यों कराया जाता है कन्या पूजन ?
नवरात्र पर्व के दौरान कन्या पूजन का बड़ा महत्व है. नौ कन्याओं को नौ देवियों के प्रतिबिंब के रूप में पूजने के बाद ही भक्तों का नवरात्र व्रत पूरा होता है। सभी शुभ कार्यों का फल प्राप्त करने के लिए कन्या पूजन किया जाता है। कुमारी पूजन से सम्मान,धन, विद्या और तेज प्राप्त होता है। इससे विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश भी होता है। होम, जप और दान से देवी इतनी प्रसन्न नहीं होतीं जितनी कन्या पूजन से होती है।
नवरात्रि के नौ दिनों तक भक्त पूरी भक्तिभाव से माता की उपासना करते हैं परन्तु नवरात्रि पूजन और व्रत तभी संपन्न माने जाते हैं, जब अंतिम दिन कन्या पूजन किया जाए।नवरात्र के दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। कन्या पूजन के रूप में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों को नौ कन्याओं के रूप में पूजा जाता है। भक्त अपने सामर्थ अनुसार कन्याओं को भोग लगाकर दक्षिणा प्रदान करते है। कन्या पूजन के बाद ही नवरात्र की पूजा को सफल माना जाता है। कन्या पूजन से माँ दुर्गा अत्यंत प्रसन्न होती है तथा अपने भक्तों के सभी दुःख हर लेती है। नवरात्र के आखरी दो दिन यानि अष्टमी और नवमी को कन्याओं के नौ रूप मान कर कन्याओं की पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार एक बार माता वैष्णों देवी ने अपने परम भक्त पंडित श्रीधर की भक्ति से प्रसन्न होकर उनकी न सिर्फ लाज बचाई थी बल्कि पूरी सृष्टि को अपने होने का अस्तित्व भी दिया है।
हमारी सेवाएं :- अष्टमी व नवमी में से इच्छानुसार आप किसी भी एक दिन कन्या पूजन करवा सकते है। पूजा में आपकी ओर से सात कन्याओं को हलवा पूरी का भोग खिलाया जाएगा तथा उन्हें
एक प्रसाद का पैकेट भी दिया जाएगा जिसमें होगा :-
1.सेब
2.केला
3.नमकीन का पैकेट
4.बिस्कुट का पैकेट
5.एक 10 रुपया का नोट
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