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नवरात्रि पर करें महापूजा एवं सप्तचंडी का पाठ
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नवरात्रि पर करें महापूजा एवं सप्तचंडी का पाठ

Thu 26 March 2026
Durga Kund Temple, Kashi
3100901(71% OFF)

Booking Closes in:

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Benefits

  • जीवन की बाधाएं और संकट का निवारण 
  • परिवार में सुख, शांति और समृद्धि
  • मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति 
  • नकारात्मक ऊर्जा और शत्रुजनों से रक्षा 
  • संतान सुख और दीर्घायु का आशीर्वाद 
  • मनोकामनाओं की पूर्ति

Description

  • दुर्गा कुंड मंदिर में करें पूजन

वाराणसी में स्थित दुर्गा कुंड का मंदिर अपने आप में ही पूर्ण शक्तियों से भरा है। मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि शुंभ निशुंभ का वध करने के बाद माता ने यही विश्राम किया था।  कहा जाता है कि नवरात्रि के दौरान माता स्वयं धरती लोक पर आती हैं और सोचिए जरा नवरात्रि के दौरान यदि दुर्गा कुंड मंदिर में पूजा की जाए तो आपके लिए कितनी फलदाई हो सकती है। यहां देवी आदिशक्ति दुर्गा यंत्र रूप में विराजमान हैं, और माना जाता है कि उनकी उपासना से हर प्रकार की बाधा और संकट दूर हो जाते हैं।

 

  • सप्तचंडी/ सप्तशती पाठ 

नवरात्रि का पर्व माता के उन 9 दिनों को समर्पित है जब उन्होंने महिषासुर का वध करने के लिए लगातार 9 दिनों तक युद्ध किया था और अंत में  महिषासुर का वध किया। दुर्गा सप्तशती पाठ में मां दुर्गा द्वारा महिषासुर, शुंभ-निशुंभ, चंड-मुंड और रक्तबीज जैसे भयानक राक्षसों के वध की कथा का वर्णन मिलता है। इसी क्रम में माय ज्योतिष काशी के दुर्गाकुंड मंदिर में दुर्गा सप्तसती पाठ का आयोजन करवा रहा है

 

हमारी सेवाएं :

  • मंदिर के प्रांगण में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से नवरात्रि की दुर्गाष्टमी के दिन पूजा संपन्न की जाएगी। 
  • पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
  • पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे

प्रसाद: 

  • लाल कपड़ा
  • पंचमेवा
  • माता की मौली

Temple Details

Temple

काशी के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिने जाने वाले श्री दुर्गा कुंड मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड में भी मिलता है। 17वीं शताब्दी में रानी भवानी द्वारा इसका जीर्णोद्धार कराया गया था। मंदिर परिसर में स्थित तालाब, जिसे दुर्गा कुंड कहा जाता है, श्रद्धालुओं के लिए पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि शुंभ और निशुंभ का वध करने के बाद देवी दुर्गा ने यहीं विश्राम किया था और वे अपने कुष्मांडा स्वरूप में यहाँ विराजमान हैं। शारदीय नवरात्रि के समय देशभर से लाखों भक्त यहाँ पहुँचते हैं और देवी के चरणों में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद पाते हैं।

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Reviews

व्यस्त जीवनशैली के कारण मंदिर जाना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन MyJyotish की मदद से मैं घर बैठे ही पूजा में शामिल हो सका। यह अनुभव सुविधाजनक होने के साथ-साथ आध्यात्मिक रूप से भी बहुत संतोषजनक था।

ऑनलाइन पूजा को लेकर शुरुआत में मुझे थोड़ी शंका थी, लेकिन MyJyotish के साथ मेरा अनुभव बहुत सकारात्मक रहा। पूजा पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हुई और मैं पूरे समय उससे जुड़ा हुआ महसूस करता रहा।

MyJyotish ऑनलाइन पूजा बुक करने के लिए एक बेहतरीन प्लेटफ़ॉर्म है। मैंने घर बैठे ही पूजा में भाग लिया और पूरे अनुष्ठान के दौरान स्वयं को आध्यात्मिक रूप से जुड़ा हुआ महसूस किया। यह अनुभव बहुत सहज, सुविधाजनक और संतोषजनक रहा।

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