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पितृ पक्ष पूजा - 16 तिथि पितृ शांति महापूजा, तिल तर्पण और पिंड अर्पण
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Pitru Shanti • Pitru Tripti • Family Prosperity • Ancestral Blessings

पितृ पक्ष पूजा - 16 तिथि पितृ शांति महापूजा, तिल तर्पण और पिंड अर्पण

Sat 26 September 2026
Gaya Tirth Kshetra, Bihar
51002100(59% OFF)

Booking Closes in:

20Day
22H
18M
30S

Benefits

  • पितरों की शांति 
  • पितरों का आशीर्वाद 
  • परिवार में सुख-शांति 
  • परिवार की समृद्धि 
  • जीवन की बाधाएं कम

Description

पितृ पक्ष क्या है?

 

  • पितृ पक्ष हिंदू धर्म में पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान करने का विशेष समय माना जाता है। मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि इस दौरान पितृ स्वयं धरती पर आते हैं।  पितृ पक्ष के दौरान प्रत्येक व्यक्ति अपने पितरों की निधन तिथि के अनुसार उसी तिथि पर श्राद्ध एवं तर्पण करता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी पितृ का निधन चतुर्थी तिथि को हुआ था, तो पितृ पक्ष में उनका श्राद्ध और तर्पण चतुर्थी तिथि के दिन ही किया जाता है। इसी प्रकार, पितृ की मृत्यु जिस तिथि को हुई हो, उसी तिथि के अनुसार पितृ पक्ष में उनका श्राद्ध कर्म किया जाता है।

 

16 तिथि पितृ शांति महापूजा

 

  • पूर्णिमा श्राद्ध – 26 सितंबर
  • प्रतिपदा श्राद्ध – 27 सितंबर
  • द्वितीया श्राद्ध – 28 सितंबर
  • तृतीया श्राद्ध – 29 सितंबर
  • चतुर्थी एवं पंचमी श्राद्ध – 30 सितंबर
  • षष्ठी श्राद्ध – 1 अक्टूबर
  • सप्तमी श्राद्ध – 2 अक्टूबर
  • अष्टमी श्राद्ध – 3 अक्टूबर
  • नवमी श्राद्ध – 4 अक्टूबर
  • दशमी श्राद्ध – 5 अक्टूबर
  • एकादशी श्राद्ध – 6 अक्टूबर
  • द्वादशी श्राद्ध – 7 अक्टूबर
  • त्रयोदशी श्राद्ध – 8 अक्टूबर
  • चतुर्दशी श्राद्ध – 9 अक्टूबर
  • सर्वपितृ अमावस्या – 10 अक्टूबर

 

गया में पितृ शांति पूजा

 

  • गया धाम को पितृ कर्म, श्राद्ध और पिंडदान के लिए विशेष पवित्र तीर्थ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने भी गया धाम में अपने पिता राजा दशरथ के निमित्त पिंडदान और श्राद्ध कर्म किया था। माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ गया आगमन से जुड़ी कथा भी गया की धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखती है। इसी कारण गया धाम में पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की विशेष महत्ता मानी जाती है। गया में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट जैसे पवित्र स्थलों का भी पितृ कर्म से विशेष संबंध बताया गया है। पुराणों में गया क्षेत्र के माहात्म्य और यहां किए जाने वाले श्राद्ध कर्म का वर्णन मिलता है।

 

इसी अवसर को देखते हुए माय ज्योतिष द्वारा गया धाम में पितृ पक्ष के पावन अवसर पर 16 तिथि पितृ शांति महापूजा का विशेष आयोजन किया जा रहा है। इस महापूजा में पितरों के निमित्त विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान एवं विशेष पूजा-अनुष्ठान कराया जाएगा।
 

श्राद्ध पूजा की विधि इस प्रकार रहेगी 

 

सर्वप्रथम पितरो की मुक्ति के लिए तर्पण किया जाएगा उनको भोग लगाया जाएगा इन पांच को भोग मे किया जाएगा शामिल I

  • गाय का भोजन
  • ब्राह्मणो का भोजन
  • चीटियों का भोजन
  • कौए का भोजन
  • कुत्ते का भोजन

 

हमारी सेवाएं 

 

  • गया में फल्गु नदी के पावन तट स्थित घाट पर में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से श्राद्ध पूजा संपन्न की जाएगी। 
  • पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
  • पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे।

Temple Details

Temple

फाल्गुनी नदी, गया 

पितृ दोष के कारण जीवन में कई प्रकार की परेशानी उत्पन्न होने लगती है। क्योंकि पितृ दोष के चलते बने बनाए कार्य बिगड़ने लगते हैं। पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए पितृ पक्ष का समय उत्तम माना जाता है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए कई स्थल ऐसे हैं जिन्हें मोक्ष प्राप्ति का स्थान माना जाता है, इन्हीं में से एक है फाग्लुनी नदी, गया। फाल्गुनी नदी स्वयं में ही पवित्र है और फाल्गुनी नदी वही तट है, जहां पर भगवान श्री राम जी ने अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान किया था। इसलिए भी यह स्थल अत्यंत पवित्र और मोक्ष देने वाला माना जाता है। यही कारण है कि हर साल लाखों की संख्या में लोग पितृ पक्ष के दौरान अपने पितरों की आत्म की शांति के लिए फाल्गुनी नदी के किनारे तर्पण और पिंडदान करते हैं।

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