पितृ पक्ष क्या है?
- पितृ पक्ष हिंदू धर्म में पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान करने का विशेष समय माना जाता है। मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि इस दौरान पितृ स्वयं धरती पर आते हैं। पितृ पक्ष के दौरान प्रत्येक व्यक्ति अपने पितरों की निधन तिथि के अनुसार उसी तिथि पर श्राद्ध एवं तर्पण करता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी पितृ का निधन चतुर्थी तिथि को हुआ था, तो पितृ पक्ष में उनका श्राद्ध और तर्पण चतुर्थी तिथि के दिन ही किया जाता है। इसी प्रकार, पितृ की मृत्यु जिस तिथि को हुई हो, उसी तिथि के अनुसार पितृ पक्ष में उनका श्राद्ध कर्म किया जाता है।
16 तिथि पितृ शांति महापूजा
- पूर्णिमा श्राद्ध – 26 सितंबर
- प्रतिपदा श्राद्ध – 27 सितंबर
- द्वितीया श्राद्ध – 28 सितंबर
- तृतीया श्राद्ध – 29 सितंबर
- चतुर्थी एवं पंचमी श्राद्ध – 30 सितंबर
- षष्ठी श्राद्ध – 1 अक्टूबर
- सप्तमी श्राद्ध – 2 अक्टूबर
- अष्टमी श्राद्ध – 3 अक्टूबर
- नवमी श्राद्ध – 4 अक्टूबर
- दशमी श्राद्ध – 5 अक्टूबर
- एकादशी श्राद्ध – 6 अक्टूबर
- द्वादशी श्राद्ध – 7 अक्टूबर
- त्रयोदशी श्राद्ध – 8 अक्टूबर
- चतुर्दशी श्राद्ध – 9 अक्टूबर
- सर्वपितृ अमावस्या – 10 अक्टूबर
गया में पितृ शांति पूजा
- गया धाम को पितृ कर्म, श्राद्ध और पिंडदान के लिए विशेष पवित्र तीर्थ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने भी गया धाम में अपने पिता राजा दशरथ के निमित्त पिंडदान और श्राद्ध कर्म किया था। माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ गया आगमन से जुड़ी कथा भी गया की धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखती है। इसी कारण गया धाम में पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की विशेष महत्ता मानी जाती है। गया में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट जैसे पवित्र स्थलों का भी पितृ कर्म से विशेष संबंध बताया गया है। पुराणों में गया क्षेत्र के माहात्म्य और यहां किए जाने वाले श्राद्ध कर्म का वर्णन मिलता है।
इसी अवसर को देखते हुए माय ज्योतिष द्वारा गया धाम में पितृ पक्ष के पावन अवसर पर 16 तिथि पितृ शांति महापूजा का विशेष आयोजन किया जा रहा है। इस महापूजा में पितरों के निमित्त विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान एवं विशेष पूजा-अनुष्ठान कराया जाएगा।
श्राद्ध पूजा की विधि इस प्रकार रहेगी
सर्वप्रथम पितरो की मुक्ति के लिए तर्पण किया जाएगा उनको भोग लगाया जाएगा इन पांच को भोग मे किया जाएगा शामिल I
- गाय का भोजन
- ब्राह्मणो का भोजन
- चीटियों का भोजन
- कौए का भोजन
- कुत्ते का भोजन
हमारी सेवाएं
- गया में फल्गु नदी के पावन तट स्थित घाट पर में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से श्राद्ध पूजा संपन्न की जाएगी।
- पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
- पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे।