हिंदू शास्त्रों में की जाने वाली "रूद्र अभिषेक" यह एक प्राचीन सनातनी धर्म अनुष्ठान है। 'रूद्र' यह शब्द भगवान शिव के तांडव रूप को दर्शाता है, और 'पूजा' उनकी की गयी साधना को। यह अनुष्ठान करने से उपासक को आंतरिक शांति और तृप्ति प्राप्त होती है। इस अनुष्ठान में भगवन शिव के रौद्र रूप की पूजा की जाती है जो की सभी बुरी शक्तिया, और बुरी उर्जाए का सर्वनाश करती है। ज्योतिष शास्त्र मे शास्त्रों ने कुछ लौकिक दोषों के लिए एक आसान उपाय के रूप में इस अनुष्ठान को भगवान शिव को समर्पित करने का सुझाव दिया है।
- त्र्यंबकेश्वर शिव मंदिर में रुद्राभिषेक पूजा का महत्व।
- "त्र्यंबकेश्वर यह भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक दिव्य ज्योतिर्लिंग है।"
रूद्र अभिषेक करते समय शिवलिंग को पंचामृत से स्नान करते है, पंचामृत घी, दूध, शक्कर, मधु , दही को मिलकर बनता है। यह अनुष्ठान केवल अधिकृत पुरोहित और त्र्यंबकेश्वर गुरूजी ही त्र्यंबकेश्वर मंदिर में कर सकते है। रूद्र अभिषेक करते समय विभिन्न सूक्तम और मंत्रो का जाप किया जाता है जैसे शिव सूक्तम, रूद्र महिमा स्त्रोत्र, महामृत्युंजय मंत्रजाप, आदि। यह अनुष्ठान करते समय विभिन्न पवित्र पान (जैसे बेल पत्र ), दूध, पानी और गन्ने का रस का भी शिव लिंग पर अभिषेक करते है।
यह माना जाता है की, कोई भी अनुष्ठान किसी पवित्र स्थान पर करना ही उचित रहता है तो त्र्यंबकेश्वर मंदिर में यह अनुष्ठान करना अधिक लाभदायक है। महाराष्ट्र, नासिक में स्थित त्र्यंबकेश्वर मंदिर १२ ज्योतिर्लिंग में से एक है, जो "तीर्थ क्षेत्र" के रूप मे जाना जाता है, तो यहाँ अनुष्ठान करना पूजा को अधिक पवित्र बना देता है। भगवान शिव के आशीर्वाद से पूजा करने वाले उपासक के सभी समस्याएं दूर हो जाती है। भगवन शिव सभी आदि भगवानो में से प्रमुख देवता है।रूद्र अभिषेक प्रदान करके भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है जिससे पूजा करने वाले व्यक्ति का जीवन सुखी हो जाता है। रूद्र अभिषेक करने से समृद्धि, खुशहाली, इच्छा पूर्ति होती है और उस के साथ- साथ बुरी उर्जाओ का नाश होता है।
रुद्र अभिषेक पूजा किसे करनी चाहिए?
- जिन लोगो को अपने जीवन से सभी बुरी शक्तियों और संभवी संकट को दूर करना है।
- विवाह के लिए मार्ग उत्पन्न करना है।
- जीवन में समृद्धि और ख़ुशी पाने के लिए।
- जिन लोगो को अपने जीवन में व्यापार संबंधित समस्याएं दूर करनी है और सफलता पानी है।
- सभी स्वास्थ संबंधित समस्याओं का नाश करने के लिए यह अनुष्ठान किया जाता है।
- मन की शांति पाने के लिए और ग्रहो से बने दोषो को मिटाने के लिए यह पूजा प्रमुख देवता भगवान शिव को समर्पित की जाती है।
रुद्राभिषेक पूजा विधि |Rudrabhishek Puja Vidhi in hindi
रुद्राभिषेक (rudrabhishekam) पूजा में बारी-बारीसे जल, दूध, दही, शक़्कर एवं शहद से अभिषेक किया जाता है।
प्राचीन रुद्राभिषेक विधि अनुसार शुक्ल यजुर्वेद में रुद्राभिषेक पूजा की विधि का विस्तृत वर्णन किया गया है।
रुद्राभिषेक विधि में कुल मिलाकर १० पाठ होते है, लेकिन इनमे केवल ८ पाठ ही किये जाते है, बचे २ पाठ शान्ति अध्याय एवं स्वस्ति प्रार्थनाध्याय है।
८ अध्याय मिलाकर अष्टाध्याय का पाठ किया जाता है - जिसे रूपक एवं षडंग पाठ कहा जाता है।
सम्पूर्ण रुद्राष्टाध्याय का वाचन करते समय आठवाँ एवं पाँचवा अध्याय पुनरावृति में नहीं लिया जाता, जिसे नमक-चमक से अभिषेक करना कहा जाता है।
रुद्राष्टाध्याय पाठ सम्पूर्ण होने पर शान्तिपाठ एवं स्वस्ति प्रार्थनाध्याय लिया जाता है, जिसके बाद पण्डितजी को दान-दक्षिणा देकर रुद्राभिषेक सम्पन्न होता है।
हमारी सेवाएं :-
- मंदिर के प्रांगण में पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ पूजन किया जाएगा। भक्त अपनी सुविधानुसार सावन के किसी भी सोमवार को पूजा करा सकते हैं।
- पंडित जी के द्वारा कॉल पर आपको संकल्प करवाया जाएगा। अभिषेक में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंगं का पूजनकर रुद्राभिषेक संपन्न किया जाएगा।
- पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे।
रुद्राभिषेक पूजा सामग्री लिस्ट ( पंडित जी द्वारा संचालित किया जायेगा )
- पंचामृत जिसमे दूध, शुद्ध देसी घी, दही, शक़्कर एवं शहद का उपयोग होता है।
- बेल पत्र (बेल के पत्ते), सुगन्धि फूल, गुलाबजल
- अष्ट गंध, यज्ञोपवीत गंगाजल, रुद्राक्ष,भस्म, नैवेद्य के लिए मिठाई
- उपलब्ध होने पर गन्ने का रस भी अभिषेक के लिए उपयोग होता है।
- नारियल पानी एवं चावल (अक्षता) भी रुद्राभिषेक में विशेष माने जाते है।
- ऋतु के अनुसार जो भी फल उपलब्ध है वो रुद्राभिषेक में समर्पित किये जाते है।
प्रसाद :
- सूखा भोग
- काला धागा ( हाथ में बांधने हेतु )