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सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों का पिंडदान और तर्पण, हर की पौड़ी - हरिद्वार
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सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों का पिंडदान और तर्पण, हर की पौड़ी - हरिद्वार

Sun 16 November 2025
Haridwar Uttarakhand
4.8(648 Reviews)

10,000+ Devotees have participated in Pujas

Benefits

 

  • पितृ दोष से मुक्ति और संतान से संबंधित समस्याओं का समाधान - पितृ दोष के कारण संतान सुख में रुकावटें उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे संतान न होने की समस्या या संतान के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे सामने आते हैं। पितृ दोष निवारण पूजा से संतान सुख की प्राप्ति होती है और संतान संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। संतान की सेहत और भविष्य के लिए पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • स्वास्थ्य में सुधार और मानसिक शांति: पूजा से व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद कम होते हैं, और व्यक्ति के शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह पूजा व्यक्ति को शारीरिक रोगों से मुक्ति दिलाती है और मानसिक शांति प्रदान करती है।
  • पारिवारिक सुख- समृद्धि - पूजा  के माध्यम से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे घर में शांति और समृद्धि का वातावरण बनता है। पारिवारिक विवाद, कलह और असमंजस को समाप्त किया जाता है, और घर में सामंजस्यपूर्ण वातावरण बना रहता है। घर के सभी सदस्य मानसिक शांति का अनुभव करते हैं और पारिवारिक रिश्तों में मजबूती आती है।

Description

सनातन धर्म में सर्व पितृ अमावस्या का खास महत्व है। इस विशेष अवसर पर पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। पितृ पक्ष के दौरान पितृ धरती लोक में आते हैं और सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध और तर्पण के बाद पितृ पुनः अपने लोक लौट जाते हैं। इस साल सर्वपितृ अमावस्या 21 सितंबर, रविवार को मनाई जाएगी, जो .......... पितृ पक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन है। दान-पुण्य: करने से इस दिन अमोघ फल प्राप्त होता है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। 

 

1: सर्वपितृ अमावस्या के दिन हर की पौड़ी हरिद्वार पितरों के तर्पण के लिए उपयुक्त है, क्योंकि यह 4 पवित्र नगरों में से हैं और यहां से मोक्षदायिनी गंगा का भी प्रभाव होता है। इस दिन यहां पूर्वजों के लिए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं, जो उन्हें संतुष्ट करते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि व शांति लाते हैं। यह उन पूर्वजों के लिए भी एक पवित्र अवसर है जिनकी पुण्यतिथि अज्ञात है।

 

2: हरिद्वार,  दो शब्दों से मिलकर बना है, हर + द्वार, यहां पर हर का अर्थ है श्री हरि विष्णु जी। मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि हर की पौड़ी में भगवान विष्णु जी का पैर पड़ा था,  इसलिए इसे हर की पौड़ी कहा जाता है। इसके अलावा हरिद्वार उन 4 पवित्र तीर्थों में से एक है, जहां अमृत की एक बूंद गिरी थी। हरिद्वार वह स्थल भी है जहां से पवित्र गंगा मां का प्रवाह होता है। यही सब खूबियां इस तीर्थ को और पवित्र बनाते हैं।
 

सर्वपितृ अमावस्या का महत्व

  • पितरों की विदाई: पितृ पक्ष का अंतिम दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या का दिन, धरती पर आए पूर्वजों को सम्मानपूर्वक विदा करने का होता है। 
  • सभी पूर्वजों का श्राद्ध: जिन पूर्वजों की पुण्य तिथि ज्ञात नहीं है, उनका श्राद्ध करने के लिए यह एक सार्वभौमिक दिन है। 
  • पाप और दुर्भाग्य का अंत: इस दिन दान-पुण्य और धार्मिक कार्य करने से जीवन से सभी बड़ी परेशानियां दूर होती हैं और पितरों की कृपा प्राप्त होती है। 
  • आध्यात्मिक लाभ: पितरों को संतुष्ट करने से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास होता है।
     

हमारी सेवाएं :-

  • हरिद्वार के घाट में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से श्राद्ध पूजा संपन्न की जाएगी। 
  • पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
  • पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे।

Temple Details

Temple

हरिद्वार,  दो शब्दों से मिलकर बना है, हर + द्वार, यहां पर हर का अर्थ है श्री हरि विष्णु जी। मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि हर की पौड़ी में भगवान विष्णु जी का पैर पड़ा था,  इसलिए इसे हर की पौड़ी कहा जाता है। इसके अलावा हरिद्वार उन 4 पवित्र तीर्थों में से एक है, जहां अमृत की एक बूंद गिरी थी। हरिद्वार वह स्थल भी है जहां से पवित्र गंगा मां का प्रवाह होता है। यही सब खूबियां इस तीर्थ को और पवित्र बनाते हैं।

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MyJyotish ऑनलाइन पूजा बुक करने के लिए एक बेहतरीन प्लेटफ़ॉर्म है। मैंने घर बैठे ही पूजा में भाग लिया और पूरे अनुष्ठान के दौरान स्वयं को आध्यात्मिक रूप से जुड़ा हुआ महसूस किया। यह अनुभव बहुत सहज, सुविधाजनक और संतोषजनक रहा।

व्यस्त जीवनशैली के कारण मंदिर जाना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन MyJyotish की मदद से मैं घर बैठे ही पूजा में शामिल हो सका। यह अनुभव सुविधाजनक होने के साथ-साथ आध्यात्मिक रूप से भी बहुत संतोषजनक था।

ऑनलाइन पूजा को लेकर शुरुआत में मुझे थोड़ी शंका थी, लेकिन MyJyotish के साथ मेरा अनुभव बहुत सकारात्मक रहा। पूजा पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हुई और मैं पूरे समय उससे जुड़ा हुआ महसूस करता रहा।

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