शिंगणापुर के शनि मंदिर में शनिदेव की 5 फुट 9 इंच व 1 फुट 6 इंच चौड़ी प्रतिमा संगमरमर के चबूतरे पर विराजमान है।
शनि देव के इस मंदिर में अपनी समस्याओं को लेकर साधारण इंसान से लेकर राजनेता और सभी बड़ी हस्तियां आती हैं और पूजा करवाती है। यहां पर पूजा करवाने से शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और शनि ढैया और साढ़े साती का प्रकोप भी कम हो जाता है।
श्री शनि देव का नाम
शनि देव को कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, रौद्रांतक, यम, सौरि, शनैश्चर, मंदा, पिप्पलाश्रय नामों से भी जाना जाता है।
मंत्र: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।, ॐ शनैश्चराय नमः।
शनि को प्रसन्न करने के लिए मंत्र: ये हैं शनि को प्रसन्न करने के मंत्र
1. सूर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्षः शिवप्रियः
मंदचार आत्मा दर्दं हरतु में शनिः।
2. नीलांजन समाभासं पुत्रां यमाग्रजं।
छाया मार्टण्डसंभूतं तं नामामि शनैश्चरम्।।प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
3. ओम शं शनैश्चराय नमः।
प्रसाद:
काला धागा : इस पूजित धागे को गले में पहनना है ।
घोड़े की नाल : यह U आकार की धातु है, जिसे आपको घर अथवा आफिस के मुख्य दरवाजे के दाईं ओर उपर की ओर लगाना है।