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शुक्र ग्रह शांति पूजा
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शुक्र ग्रह शांति पूजा

Fri 05 June 2026
Navgrah Shani Mandir, Ujjain Madhya Pradesh
Prasad Box
2500901(64% OFF)

Booking Closes in:

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Puja Benefits

 

  • शुक्र ग्रह शांति के लाभ 
  • शुक्र ग्रह के नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं।
  • दांपत्य जीवन में खुशहाली। 
  • विवाह के योग बनेंगे।
  • पारिवारिक जीवन बेहतर होता है।
     

Description

 

  • शुक्र ग्रह को मजबूत करना क्यों है जरूरी ?

ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को प्रेम संबंधों, विलासिता, धन, आकर्षण आदि को दर्शाता है। शुक्र यदि दुर्बल हो तो यह चिंता का विषय है। शास्त्रों  के अनुसार जीवन मे घटने वाली हर एक घटना ग्रहों की चाल से प्रभावित होती हैं। शुक्र ग्रह सुंदरता और कलाओं का कारक ग्रह है। कहा जाता है कि यदि किसी की कुंडली में शुक्र की स्थिति शुभ नहीं है तो उसे धन हानि का सामना भी करना पड़ सकता है। इसके साथ कि प्रेम में अलगाव, शारीरिक सुख में कमी, भोग विलास में कमी, सफाई में कमी, सुखों में कमी आदि हो सकती है।  तो यदि आपके जीवन में धन, संपदा, प्रेम आदि में बाधाएं आ रही हैं, तो हो सकता है कि आपकी कुंडली शुक्र देव शुभ स्थिति में नहीं बैठे होंगे, इसलिए शुक्र देव को मजबूत करना जरूरी होता है। 

 

  • क्यों की जाती है शुक्र शांति पूजा?

शुक्र ग्रह को प्रसन्न करने से जीवन में खुशी, आनंद, सौंदर्य, रोमांस, प्रेम, विलासिता और शांति मिलती है और वहीं अगर आप महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं को शुक्र देव की पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा अगर कुंडली में शुक्र ग्रह पीड़ित हो या फिर शुक्र कमजोर है, तो आपको अवश्य ही शुक्र शांति पूजा करवानी चाहिए।

 

हमारी सेवाए :

  • मंदिर के प्रांगण में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से पूजा संपन्न की जाएगी। 
  • पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
  • पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे।

 

प्रसाद :

  • पंचमेवा

Temple Details

Temple

नवग्रहों की तपस्थली
स्कंद पुराण के अनुसार नवग्रहों ने भी इस पावन स्थल पर आकर शिवलिंग स्थापित किए और तपस्या कर भगवान शिव से वरदान प्राप्त किए। उनके द्वारा स्थापित लिंगों के नाम हैं- नरादित्य, सोमेश्वर, मंगलेश्वर, बुधेश्वर, बृहस्पतीश्वर, शुक्रेश्वर, स्थावरेश्वर, मुनीश्वर, राहु-केतुऐश्वर।....

जहां क्षिप्रा, क्षाता, और गुप्त सरस्वती नदियाँ मिलती हैं, उसे त्रिवेणी संगम कहते हैं। यह स्थान मोक्ष प्रदायक माना गया है। यहां स्नान, दान और स्थावरेश्वर महादेव के दर्शन से समस्त पापों का नाश होता है और शनि पीड़ा का शमन होता है। इसी कारण यह स्थान नवग्रह त्रिवेणी शनि मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ। 
उज्जैन के त्रिवेणी संगम पर ही राजा विक्रमादित्य ने भगवान शनिदेव और नवग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा करवाई और एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। आज भी यह स्थान भक्तों के लिए आस्था और शांति का केंद्र बना हुआ है। यहां शनि देव के साथ दाईं ओर श्री गणेश जी, बाईं ओर ढैय्या शनि, पीछे श्री बालाजी हनुमान विराजमान हैं।

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