पितृ पक्ष की द्वादशी तिथि के दिन माय ज्योतिष द्वारा मोक्षदायिनी हरिद्वार धाम में गंगा तट पर सन्यासियों का श्राद्ध विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वादशी तिथि का श्राद्ध विशेष रूप से उन दिवंगत आत्माओं, संतों और परिजनों को समर्पित होता है, जिन्होंने अपने जीवन में सन्यास लिया था या जो सन्यासी रूप में ब्रह्मलीन हुए।
क्या है द्वादशी सन्यासी श्राद्ध अनुष्ठान?
- सन्यासियों का श्राद्ध विशेष अनुष्ठान पावन हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर आयोजित होने वाली एक अत्यंत पवित्र वैदिक पूजन प्रक्रिया है। सन्यास ग्रहण कर चुकी आत्माओं का सामान्य गृहस्थ नियमों से अलग विशेष विधान के साथ पूजन किया जाता है।
अनुष्ठान में शामिल प्रमुख पूजन विवरण
- सन्यासी पितरों के नाम व गोत्र का उच्चारण कर संकल्प।
- मां गंगा की विशेष आराधना।
- कुश, काले तिल और गंगाजल से तर्पण।
- पिंड अर्पित कर पूजा-अर्चना।
- अन्न, फल और दान का अर्पण।
- परम शांति के लिए वैदिक मंत्रों का जाप।
- शाम के समय दीपदान।
- सुख -शांति के लिए विशेष प्रार्थना।
किन लोगों को यह अनुष्ठान करवाना चाहिए?
- जिनके किसी पूर्वज ने जीवन में सन्यास लिया था।
- जो श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करना चाहते हैं।
- जो पितृ दोष निवारण शांति की कामना करते हैं।
- जो समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद चाहते हैं।
द्वादशी – सन्यासियों का श्राद्ध
हरिद्वार गंगा तट पर दिवंगत सन्यासियों एवं पितरों के निमित्त विशेष श्राद्ध, तर्पण, पिंड अर्पण एवं दीपदान — शांति, तृप्ति एवं परिवार के मंगल हेतु।
हमारी सेवाएं
- हरिद्वार के घाट में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से श्राद्ध पूजा संपन्न की जाएगी।
- पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
- पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे।