महालक्ष्मी हिन्दू धर्म की प्रमुख देवी है। उन्हें धन की देवी के रूप में भी जाना जाता है। माता महालक्ष्मी के अनेक रूप है जिस में से उनके आठ स्वरूप जिन को अष्टलक्ष्मी कहते है प्रसिद्ध रूप से जाना जाता है। माँ लक्ष्मी का अभिषेक दो हाथी करते हैं। वह कमल के आसन पर विराजमान रहती है।कमल कोमलता का प्रतीक है। माँ लक्ष्मी के एक मुख, चार हाथ हैं। वह एक लक्ष्य और चार प्रकृतियों (दूरदर्शिता, दृढ़ संकल्प, श्रमशीलता एवं व्यवस्था शक्ति) का प्रतीक हैं।दोनों हाथों में कमल-सौन्दयर् और प्रामाणिकता के प्रतीक है। दान मुद्रा से उदारता तथा आशीर्वाद मुद्रा से अभय अनुग्रह का बोध होता है।
माँ लक्ष्मी प्रसन्नता की, उल्लास की, विनोद की देवी है। वह जहाँ रहेगी हँसने-हँसाने का वातावरण बना रहेगा। अस्वच्छता भी दरिद्रता का ही रूप है जिससे देवी अप्रसन्न होती है इसलिए उनकी आराधना में स्वछता बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। सौन्दर्य, स्वच्छता एवं कलात्मक सज्जा का ही दूसरा नाम है। लक्ष्मी सौन्दर्य की देवी है। वह जहाँ रहेगी वहाँ स्वच्छता, प्रसन्नता, सुव्यवस्था, श्रमनिष्ठा एवं मितव्ययिता का वातावरण बना रहेगा। देवी की अनुकम्पा से कभी धन संपत्ति की कमी नहीं होती है। उनकी कृपा से रुकें हुए कार्य भी बनने लगते है। यदि आप धन -व्यापर की समस्या से परेशान है तो आपको यह पूजा अवश्य ही करनी चाहिए।
हमारी सेवाएं :-
हमारे पंडित जी द्वारा अनुष्ठान से पहले संकल्प के लिए आपको फोन किया जाएगा तथा अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद दुबारा आपको सूचित किया जाएगा। पूजा के बाद प्रसाद भी भिजवाया जाएगा।
पूजा का प्रसाद :-
- लाल कपड़े में लिपटे हुए कनकधारा यंता
- अखंड चावल के दाने
पूजा का प्रसाद लॉकडाउन के बाद भिजवाया जाएगा।