उज्जैन में स्थित हरसिद्धि मंदिर सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है, क्योंकि यह मंदिर लगभग 2000 साल पुराना है। मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि उज्जैन का हरसिद्धि मंदिर वही शक्तिपीठ है, जहां पर माता सती की कोहनी का हिस्सा गिरा था। इसके अलावा कहा जाता है कि राजा विक्रमादित्य हरसिद्धि माता को अपनी कुलदेवी...
..और आराध्या देवी के तौर पूजा करते थे। इस मंदिर में पूजा करने से मनोकामना पूर्ण होती है और सर्वबाधाओं से मुक्ति मिलती है।
- गर्भगृह में तीन मूर्तियां हैं। सबसे ऊपर अन्नपूर्णा, मध्य में हरसिद्धि तथा नीचे माता कालका विराजमान हैं। यहां दो खंभे हैं, जिस पर दीप प्रज्जवलित किए जाते हैं। उज्जैन में हरसिद्धि देवी की आराधना करने से शिवजी और शक्ति दोनों की पूजा हो जाती है। ऐसा इसलिए कि यह ऐसा स्थान है, जहां महाकाल और मां हरसिद्धि के दरबार हैं।
- मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि माता हरसिद्धि सुबह गुजरात के हरसद गांव स्थित हरसिद्धि मंदिर में जाती हैं तथा रात्रि विश्राम के लिए शाम को उज्जैन स्थित मंदिर आती हैं, इसलिए यहां की संध्या आरती का विशेष महत्व है। माता हरसिद्धि की साधना से समस्त प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इसलिए नवरात्रि में यहां साधक साधना करने आते हैं।
हमारी सेवाएं :-
- मंदिर के प्रांगण में युगान्तरित पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ आपके नाम और गोत्र से नवरात्रि की दुर्गाष्टमी के दिन पूजा संपन्न की जाएगी।
- पूजन में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी, साथ ही पूर्ण विधि - विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।
- पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे
प्रसाद:
- लाल कपड़ा
- पंचमेवा
- माता की मौली