मार्कंडेय महादेव मंदिर का महत्व
- यहां विराजमान भगवान शिव को महामृत्युंजय माना जाता है. काशी का मतलब ही है बाबा भोलेनाथ की नगरी ऐसा नगर जो शिव का निवास स्थान है। काशी में भगवान के कई बड़े मंदिर है- इसमें मारकण्डेय महादेव का नाम भी शामिल है, जहां श्रावण के महीने में भक्तों का तांता लगा रहता है। वहीं, सावन के महापर्व पर यहां काशी विश्वनाथ से भी ज्यादा भीड़ देखी जाती है।
मंदिर को लेकर मान्यता
- इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि मंदिर में भगवान शिव को चढ़ा जल ग्रहण करने से भक्तों को काफी रोगों से मुक्ति मिल जाती है। कई भक्त अपनी समस्या लेकर इस मंदिर में आते हैं और बाबा से मनचाहा फल प्राप्त करते है। जो भक्त सच्चे मन से बाबा की पूजा करते हैं, उनके तमाम रोगों और कष्टों से मुक्ति भी मिल जाती है।
पुत्ररत्न की होती है प्राप्ति
- मंदिर को लेकर एक मान्यता है कि महाशिवरात्रि और उसके दूसरे दिन राम नाम लिखा हुआ बेलपत्र चढ़ाने से पुत्ररत्न की प्राप्ति होती है।
यमराज को लौटना पड़ा था वापस
- प्राचीन काल में जब मारकण्डेय ऋषि पैदा हुए थे तो उन्हें आयु दोष था। उनके पिता ऋषि मृकण्ड को ज्योतिषियों ने बताया था कि बालक की आयु मात्र 14 वर्ष है, यह सब सुनकर ऋषि काफी दुखी हुए और ब्राह्मणों की सलाह पर गंगा गोमती के संगम तट पर बालू से शिवलिंग बनाकर महादेव की पूजा-अर्चना करने लगे और महादेव की उपासना में लीन हो गये। इस दौरान जब बालक मारकण्डेय की 14 वर्ष पूरे हुए तो यमराज उन्हें लेने आ गए। उस वक्त मारकण्डेय भी शिव की अराधना कर रहे थे। तब जैसे ही यमराज बालक के प्राण लेने के लिए आगे बढ़े तब भगवान शिव प्रकट हो गए। उन्होंने यमराज से कहा कि मेरा भक्त सदैव अमर रहेगा और मुझसे पहले उसकी पूजा की जाएगी। तभी से इस जगह पर मारकण्डेय जी व महादेव जी की पूजा की जाने लगी और इस पवित्र स्थान का नाम मारकण्डेय महादेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
हमारी सेवाएं-
- मंदिर के प्रांगण में पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ पूजन किया जाएगा। भक्त अपनी सुविधानुसार सावन के किसी भी सोमवार को पूजा करा सकते हैं।
- पंडित जी के द्वारा कॉल पर आपको संकल्प करवाया जाएगा। अभिषेक में उपयोग की जाने वाली सारी सामाग्री पंडित जी की तरफ से दी जाएगी।
- पूजा संपन्न होने के पश्चात रिकार्डेड वीडियो और फोटो भेजे जाएंगे।
प्रसाद-
- मिश्री
- अभिमंत्रित धागा
- मार्कंडेय महादेव की तस्वीर