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Indira Ekadashi 2026: इंदिरा एकादशी पर इस विधि से करें पूजा, जानें श्री हरि का प्रिय, आरती से लेकर सबकुछ

Vaishnavi DwivediVaishnavi DwivediUpdated 06 Oct 2026 06:00 AM IST
Indira Ekadashi 2026: इंदिरा एकादशी पर इस विधि से करें पूजा, जानें श्री हरि का प्रिय, आरती से लेकर सबकुछ

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Indira Ekadashi 2026: इंदिरा एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। आइए इस व्रत से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं। ताकि पितरों की आत्मा को शांति मिल सके।

इंदिरा एकादशी (Indira Ekadashi 2026) का दिन बेहद खास माना गया है। आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की यह एकादशी एकमात्र ऐसी एकादशी मानी जाती है, जिसका व्रत करने से न केवल व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि उनके पूर्वजों को भी यमलोक के कष्टों से मुक्ति मिलकर सीधे बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। अगर आपके किसी पूर्वज से जाने-अनजाने में कोई पाप हुआ हो, जिस वजह से उन्हें मुक्ति नहीं मिल पा रही हो, तो इंदिरा एकादशी का व्रत रखकर उसका पुण्य अपने पितरों के नाम समर्पित करने से उनकी आत्मा तुरंत तृप्त हो जाती है। ऐसे में आइए यहां इस एकादशी की प्रमुख बातों को जानते हैं।

श्री हरि की पूजा विधि  (Indira Ekadashi 2026 Puja Rituals ) 

  • एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें। 
  • हाथ में जल और तिल लेकर भगवान विष्णु और अपने पितरों का ध्यान करते हुए निर्जला या फलाहारी व्रत का संकल्प लें।
  • घर के मंदिर को साफ करें। एक वेदी पर पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
  • श्री हरि को पीले चंदन या रोली का तिलक लगाएं। 
  • उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल, अक्षत और धूप-दीप अर्पित करें।
  • भगवान विष्णु के सामने बैठकर इंदिरा एकादशी की पौराणिक व्रत कथा पढ़ें या सुनें। 
  • इसके बाद 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
  • अंत में धूप और दीप से भगवान विष्णु की आरती करें। 
  • भगवान की पूजा के बाद तांबे के पात्र में जल, गंगाजल, कच्चा दूध और काले तिल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके अपने पितरों का तर्पण करें।
  • पूजा के बाद किसी ब्राह्मण को सात्विक भोजन कराएं और अपनी क्षमता के अनुसार दान दें।

भगवान विष्णु के प्रिय भोग  (Indira Ekadashi 2026 Bhog List) 

  • तुलसी दल: श्री हरि के किसी भी भोग में तुलसी दल का पत्ता होना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि वह बिना तुलसी के भोग स्वीकार नहीं करते हैं।
  • पीली मिठाइयां और फल: बेसन के लड्डू, केसरिया खीर, केला, पपीता और पीले रंग के फल भगवान विष्णु को बेहद प्रिय हैं।
  • पंचामृत: श्री हरि को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिलाकर बनाया गया पंचामृत अर्पित करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

पूजा के मंत्र (Indira Ekadashi 2026 Puja Mantra) 

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  • शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्।
    विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥

इंदिरा एकादशी व्रत के नियम (Indira Ekadashi 2026 Fast Rules) 

  • एकादशी के दिन घर में चावल का प्रयोग पूरी तरह वर्जित होता है। इस दिन न तो चावल बनाएं और न ही खाएं।
  • दशमी की रात से ही सात्विक भोजन करें और मसूर की दाल, लहसुन, प्याज या तामसिक चीजों का सेवन बंद कर दें।
  • एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, पूजा के लिए एक दिन पहले ही तुलसी दल तोड़कर रख लें।
  • घर में शांति का माहौल बनाए रखें, किसी से बहस न करें और बड़ों का आदर करें।

।।भगवान विष्णु जी की आरती।। (Lord Vishnu Aarti)

ॐ जय जगदीश हरे आरती

ॐ जय जगदीश हरे,

स्वामी जय जगदीश हरे ।

भक्त जनों के संकट,

दास जनों के संकट,

क्षण में दूर करे ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

जो ध्यावे फल पावे,

दुःख बिनसे मन का,

स्वामी दुःख बिनसे मन का ।

सुख सम्पति घर आवे,

सुख सम्पति घर आवे,

कष्ट मिटे तन का ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

मात पिता तुम मेरे,

शरण गहूं किसकी,

स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।

तुम बिन और न दूजा,

तुम बिन और न दूजा,

आस करूं मैं जिसकी ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम पूरण परमात्मा,

तुम अन्तर्यामी,

स्वामी तुम अन्तर्यामी ।

पारब्रह्म परमेश्वर,

पारब्रह्म परमेश्वर,

तुम सब के स्वामी ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम करुणा के सागर,

तुम पालनकर्ता,

स्वामी तुम पालनकर्ता ।

मैं मूरख फलकामी,

मैं सेवक तुम स्वामी,

कृपा करो भर्ता॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम हो एक अगोचर,

सबके प्राणपति,

स्वामी सबके प्राणपति ।

किस विधि मिलूं दयामय,

किस विधि मिलूं दयामय,

तुमको मैं कुमति ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,

ठाकुर तुम मेरे,

स्वामी रक्षक तुम मेरे ।

अपने हाथ उठाओ,

अपने शरण लगाओ,

द्वार पड़ा तेरे ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

विषय-विकार मिटाओ,

पाप हरो देवा,

स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा ।

श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,

श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,

सन्तन की सेवा ॥

ॐ जय जगदीश हरे,

स्वामी जय जगदीश हरे ।

भक्त जनों के संकट,

दास जनों के संकट,

क्षण में दूर करे ॥

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