
करवा चौथ का पर्व हर साल धूमधाम के साथ मनाया जाता है। आमतौर पर यह व्रत शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखती हैं, लेकिन लोगों के मन अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या कुंवारी लड़कियां या जिन लड़कियों की सगाई हो चुकी है, वे भी करवा चौथ का व्रत (Karwa Chauth 2026) रख सकती हैं? तो आइए इस आर्टिकल में इस सवाल का जवाब जानते हैं।
जी हां, कुंवारी कन्याएं भी करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं। हालांकि, सुहागिन महिलाओं और कुंवारी लड़कियों के व्रत रखने के नियमों में काफी अंतर होता है। आइए जानते हैं कुंवारी लड़कियों के लिए करवा चौथ व्रत के क्या नियम हैं और उन्हें पूजा कैसे करनी चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर कोई कुंवारी कन्या मनचाहा पति पाने की इच्छा रखती है, तो वह करवा चौथ का व्रत रख सकती है। इसके अलावा, जिन लड़कियों का रिश्ता पक्का हो चुका है या सगाई हो गई है, वे अपने होने वाले पति की मंगल कामना और लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं।
सुहागिन महिलाएं रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर और छलनी से चांद देखने के बाद व्रत खोलती हैं, लेकिन कुंवारी लड़कियों को चंद्रमा के बजाय तारों को देखकर अपना व्रत खोलना चाहिए। तारों को जल अर्पित करने के बाद ही वे पानी पी सकती हैं।
कुंवारी लड़कियों को पूजा के दौरान या व्रत खोलते समय छलनी का प्रयोग नहीं करना चाहिए। वे सीधे तारों के दर्शन करके जल चढ़ा सकती हैं।
शादीशुदा महिलाओं को उनकी सास सरगी देती हैं, लेकिन कुंवारी लड़कियों के लिए सरगी की जरूरी नहीं होती। अगर लड़की की सगाई हो चुकी है, तो उसकी होने वाली सास उसे सरगी या उपहार भेज सकती है।
कुंवारी कन्याओं को करवा चौथ के दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही माता पार्वती से मनचाहे पति और सुखी जीवन का आशीर्वाद मांगना चाहिए।
शादीशुदा महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। कुंवारी कन्याएं चाहें तो निर्जला व्रत रख सकती हैं या फिर स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार खा सकती हैं।
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