
Mahavir Jayanti 2026: भारत में विविध धर्म, जाति और समुदाय के लोग वास करते हैं और यही हमारे हिंदुस्तान की खूबसूरती है। जिस प्रकार हिंदू, मुस्लिम, सिख धर्मों के पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है। ठीक इसी प्रकार जैन धर्म में चैत्र मास शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर महावीर जयंती मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन 24वें तीर्थकर स्वामी महावीर का जन्म हुआ था। लेकिन इस साल महावीर जयंती को लेकर लोगों के मन में काफी कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है कि महावीर जयंती का पर्व किस दिन मनाया जाएगा और उनकी उपासना के लिए कौन से मुहूर्त शुभ हैं।
तिथि त्रयोदशी - 06:55 ए एम तक, चतुर्दशी
पक्ष - शुक्ल पक्ष
वार - मंगलवार
नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी - 03:20 पी एम तक, उत्तराफाल्गुनी
योग - गण्ड - 03:41 पी एम तक, वृद्धि
करण - तैतिल - 06:55 ए एम तक, गर - 06:57 पी एम तक, वणिज
अभिजित मुहूर्त - 12:00 पी एम से 12:50 पी एम
ब्रह्म मुहूर्त - 04:40 ए एम से 05:26 ए एम
गोधूलि मुहूर्त - 06:37 पी एम से 07:00 पी एम
राहुकाल - 03:31 पी एम से 05:05 पी एम
सूर्योदय - 06:12 ए एम
सूर्यास्त - 06:38 पी एम
चंद्रोदय - 05:13 पी एम
चन्द्रास्त - 05:28 ए एम, अप्रैल 01
चंद्र राशि - सिंह - 09:32 पी एम तक, कन्या
सूर्य राशि - मीन
राहुकाल - 03:31 पी एम से 05:05 पी एम
यमगण्ड - 09:19 ए एम से 10:52 ए एम
गुलिक काल - 12:25 पी एम से 01:58 पी एम
दुर्मुहूर्त - 08:41 ए एम से 09:31 ए एम, 11:15 पी एम से 12:01 ए एम, अप्रैल 01
चलिए अब हम आपको बताते हैं कि महावीर जयंती का धार्मिक महत्व क्या है। महावीर जयंती केवल स्वामी महावीर का जन्मोत्सव ही नहीं बल्कि पांच महाव्रतों का पालन करने वाला श्रेष्ठ दिन है। जैन धर्म में पांच महाव्रतों का जिक्र दिखता है जिसमें अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह (लालच ना करना), ब्रह्मचर्य और अस्तेय (चोरी ना करना)। जो व्यक्ति इन पांच व्रतों का पालन करना सीख जाए वह सासांरिक सुख और दुख से जन्मों-जन्मों तक के लिए मुक्त हो जाता है और ईश्वर के शरण में चला जाता है।
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