Panchak 2026: चैत्र नवरात्रि से पहले पंचक काल शुरू, जानें तारीख, नियम और मां के स्वरूप
Panchak 2026: चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, यूं तो साल में कुल चार नवरात्रि आती हैं लेकिन चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि को विशेष माना जाता है। इस साल चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ 19 मार्च से होगा और 27 मार्च तक नवरात्रि का समापन होगा।
चैत्र नवरात्रि से पहले पंचक काल शुरू
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, ग्रहों और नक्षत्रों का प्रभाव सटीक तौर से जातकों के ऊपर पड़ता है। माना जाता है कि जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में रहते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र से गुजरता है, तब पंचक काल शुरू होता है। पंचक को हिंदू पंचांग में अशुभ काल माना गया है जिस दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा करना, घर की छत डलवाना, शव का दाह संस्कार करना और लकड़ी के समान की खरीदारी करना वर्जित माना जाता है। आपको बता दें कि चंद्रमा 16 मार्च की शाम 6 बजकर 13 मिनट को कुंभ राशि में गोचर करेंगे और इसके बाद मीन में। मीन राशि में चंद्रमा 21 मार्च की रात्रि 2 बजकर 27 मिनट तक रहने वाले हैं। अप्रैल में पंचक काल 16 मार्च से लेकर 20 मार्च तक रहने वाला है और विशेष बात ये है कि 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि प्रारंभ हो रही है।
माता दुर्गा के नौ स्वरूप
19 मार्च - माता शैलपुत्री की पूजा की जाएगी।
20 मार्च - माता ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाएगी।
21 मार्च - माता चंद्रघंटा की पूजा करने का प्रावधान है।
22 मार्च - माता कूष्मांडा के उपासना का दिन।
23 मार्च - स्कंद माता की पूजा करने का प्रावधान।
24 मार्च - माता कात्यायनी की आराधना करने का दिन।
25 मार्च - कालरात्रि माता की उपासना की जाएगी।
26 मार्च - माता महागौरी की कृपा प्राप्त करने का विशेष दिन।
27 मार्च - माता सिद्धिदात्री की आराधना के लिए खास दिन।