
ज्योतिष शास्त्र में पंचक की अवधि को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में गोचर करता है, तब उस 5 दिनों की अवधि को पंचक कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचक के दौरान किया गया कोई भी शुभ काम या अनजाने में हुई गलती का फल पांच गुना बढ़कर मिलता है। इसीलिए पंचक काल में घर बनवाना, दक्षिण दिशा की यात्रा, लकड़ी या ईंधन एकत्र करना और चारपाई बुनवाना वर्जित माना जाता है।
हालांकि, कई बार पंचक के नियमों का पालन करना मुश्किल होता है, या पंचक काल में ही किसी प्रियजन का दाह संस्कार करना पड़ जाता है। ऐसी स्थिति में पंचक दोष का भय बना रहता है। शास्त्रों में पंचक के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए कुछ विशेष दान और ज्योतिषीय उपायों बताए गए हैं। आइए यहां उनके बारे में जानते हैं।
वैदिक पंचांग के अनुसार, पंचक की शुरुआत 27 अगस्त को दोपहर 01 बजकर 35 मिनट से हो चुकी है। वहीं, इसका समापन 01 सितंबर 2026 को सुबह 03 बजकर 24 मिनट पर होगा।
अगर पंचक के दौरान मजबूरी में घर की छत ढलवानी पड़े या लकड़ी का काम करवाना पड़े, तो इसके वास्तु दोष से बचने के लिए पंचक समाप्त होने के बाद किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद को तांबे के बर्तन में गेहूं का आटा भरकर दान करना चाहिए।
राज पंचक या अग्नि पंचक के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना या नुकसान के भय को टालने के लिए मंदिर में गाय का शुद्ध देसी घी और गुड़ दान करें। इससे घर-परिवार में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता।
अगर पंचक काल में परिवार में किसी का निधन हो जाए, तो अंतिम संस्कार के समय शव के साथ आटे या बेसन के 5 पुतले बनाकर उनका भी दाह संस्कार किया जाता है। इसके अलावा गरुड़ पुराण के अनुसार, अंतिम संस्कार के बाद जल से भरा कांस्य बर्तन और 5 सूखे नारियल दान करने से मृत आत्मा को शांति मिलती है और परिजनों पर पंचक दोष नहीं लगता।
मृत्यु पंचक या चोर पंचक के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने के लिए शनिवार या पंचक के दिनों में पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और किसी गरीब को तेल व काले तिल का दान करें। इससे शनि और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।
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