
पितृ पक्ष का सनातन धर्म में बड़ा धार्मिक महत्व माना गया है। यह 16 दिनों की वह पवित्र अवधि है। पितृ पक्ष के दौरान आने वाली एकादशी तिथि को एकादशी श्राद्ध या इंदिरा एकादशी श्राद्ध कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन (Pitru Paksha Ekadashi Shradh 2026) किया गया श्राद्ध और तर्पण पितरों को मोक्ष प्रदान करता है और घर में सुख-शांति लेकर आता है, जिन पितरों की मृत्यु एकादशी तिथि को हुई हो थी, तो उनका श्राद्ध इस दिन करना चाहिए। आइए इससे जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
सनातन धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। पितृ पक्ष में पड़ने वाली एकादशी के दिन जब भगवान श्री हरि की पूजा के साथ पितरों का तर्पण किया जाता है, तो पितृ बेहद खुश होते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन दान-पुण्य और तर्पण करने से पितरों को कष्टों से मुक्ति मिलती है और उन्हें बैकुंठ धाम में स्थान मिलता है, जिन जातकों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए भी यह दिन विशेष उपाय करने का खास अवसर है।
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