
पितृ पक्ष का पवित्र समय चल रहा है और आज तृतीया तिथि का श्राद्ध है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि का श्राद्ध उन पूर्वजों के लिए किया जाता है, जिनकी मृत्यु किसी भी महीने की तृतीया तिथि को हुई हो। इस बार तृतीया श्राद्ध के दिन भरणी नक्षत्र का बहुत ही दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में भरणी नक्षत्र का संबंध यमराज से माना गया है। इसलिए जब तृतीया तिथि और भरणी नक्षत्र एक साथ मिलते हैं, तो इस दिन किए गए तर्पण, दान और दीपदान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। आइए जानते हैं कि तृतीया श्राद्ध पर घर के किन खास कोनों में दीपक जलाने से पितृ प्रसन्न होते हैं?
शास्त्रों में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। ऐसे में शाम को घर के दक्षिण हिस्से में सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं। दीपक की लौ दक्षिण दिशा की तरफ रखें और मन ही मन पितरों का ध्यान करते हुए उनका आशीर्वाद लें।
शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दोनों तरफ सरसों के तेल का दीपक जरूर रखें। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष में पूर्वज हमारे घर आते हैं। ऐसे घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
अगर हो पाए, तो पास के किसी मंदिर पर मौजूद पीपल के पेड़ के नीचे जाकर एक दीपक जलाएं और उसमें थोड़े से काले तिल डाल दें। पीपल के पेड़ में ब्रह्मा,विष्णु, महेश के साथ-साथ सभी पितरों का वास माना जाता है। ऐसा करने से जीवन में खुशहाली आती है। साथ ही पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।
घर में जहां आप पीने का पानी रखते हैं, वहां शाम के समय देसी घी का एक दीपक जलाएं। ऐसा करने से पितृ तृप्त होते हैं और घर में आरोग्य व शांति बनी रहती है।
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