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Raksha Bandhan 2026: राखी बांधते हुए भूलकर न करें ये गलतियां, भाई-बहन के रिश्ते में आ सकती है खटास

Kumari Nisha ThapaKumari Nisha ThapaUpdated 21 Aug 2026 02:33 PM IST
Raksha Bandhan 2026: राखी बांधते हुए भूलकर न करें ये गलतियां, भाई-बहन के रिश्ते में आ सकती है खटास

Special Things

रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस पावन दिन पर कुछ गलतियों से बचना चाहिए आइए यहां जानते हैं।

भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक पर्व रक्षा बंधन इस साल 28 अगस्त को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस पावन त्योहार का विशेष महत्व है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधती हैं। शास्त्रों के अनुसार, यह पर्व जितना पवित्र है, इसे मनाने के नियम भी उतने ही कठिन हैं। कई बार अनजाने में हम कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिनका नकारात्मक असर भाई-बहन के रिश्ते और भाई के जीवन पर पड़ सकता है। आइए जानते हैं राखी बांधते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए?

भद्रा काल में राखी बांधना

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भद्रा काल के दौरान कोई भी शुभ काम नहीं करना चाहिए। रक्षा बंधन पर भी भद्रा का साया अशुभ माना जाता है। हालांकि इस साल राहत की बात यह है कि भद्रा काल (27 अगस्त रात 09: 34 तक) सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो रहा है, जिससे पूरा सुबह का समय राखी बांधने के लिए बेहद शुभ रहेगा। 

टूटी हुई या खंडित राखी का चयन  

बाजार से राखी खरीदते समय या घर पर चुनते समय ध्यान रखें कि राखी कहीं से कटी-फटी या टूटी हुई न हो। खंडित राखी बांधना अशुभ माना जाता है, इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और भाई-बहन के रिश्ते में दूरियां आ सकती हैं। हमेशा साफ-सुथरी और पूर्ण राखी ही खरीदें।

काले रंग की राखी का प्रयोग

आजकल फैशन के दौर में लोग कई तरह के रंग-बिरंगे डिजाइन राखी के लिए उपयोग करने लगे हैं, लेकिन ज्योतिष में काले रंग को शनि और राहू का प्रतीक माना जाता है जो नकारात्मकता का कारक है। भाई की कलाई पर कभी भी काले रंग की राखी नहीं बांधनी चाहिए। ऐसे में लाल, पीले, केसरिया या सुनहरे रंग की ही राखी खरीदें।

राखी बांधते समय गलत दिशा में बैठना

पूजा या राखी बांधने की विधि के दौरान दिशा का खास महत्व होता है। राखी बंधवाते समय भाई का मुख हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर मुख करके राखी बंधवाना शास्त्रों में वर्जित माना गया है।

बिना अक्षत और तिलक के पूजा थाली

सिर्फ राखी बांध देना ही काफी नहीं है। पूजा की थाली में कुमकुम, रोली, अक्षत, दीया और मिठाई होना बहुत जरूरी होता है। भाई के माथे पर बिना तिलक और अक्षत लगाए कभी भी राखी न बांधें। अक्षत को पूर्णता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
इसके अलावा राखी बांधते समय भाई का सिर न ढकना  यह एक आम भूल है, जो कई लोग कर देते हैं।  इसलिए भाई को राखी बांधते समय और आरती उतारते समय उसका सिर रुमाल या किसी साफ कपड़े से जरूर ढंके। माना जाता है कि खुले सिर भाई को तिलक लगाना और राखी बांधना अशुभ फल दे सकता है।  

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