शनि साढ़े साती क्या होती है? यहां जानिए इसके 3 चरण और इससे बचने के उपाय।
हिंदू धर्म में शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है। शनि का नाम सुनते ही लोग अक्सर डर जाते हैं, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं। शनि साढ़े साती कर्मों का हिसाब है। अगर आप मेहनती और ईमानदार हैं, तो इसी दौरान आपको खूब तरक्की भी मिल सकती है। ऐसे में आइए यहां जानते हैं कि शनि की साढ़े साती क्या होती है? और इससे जुड़ी प्रमुख बातें।
शनि साढ़े साती होती क्या है?
ज्योतिष के अनुसार जब शनि देव किसी जातक की जन्म राशि यानी चंद्र राशि से बारहवे, पहले और दूसरे भाव में गोचर करते हैं, तब साढ़े साती शुरू होती है। इस पूरे समय की अवधि 7.5 साल यानी साढ़े सात साल की होती है। इसलिए इसे साढ़े साती कहते हैं। शनि को कर्मफलदाता कहा जाता है। ये 7.5 साल में आपको आपके कर्मों का फल देते हैं और जीवन की जरूरी सीख भी।
साढ़े साती के 3 चरण
पूरी साढ़े साती 3 हिस्सों में बंटी होती है। हर हिस्सा करीब 2.5 साल का होता है।
पहला चरण - ( आरंभ चरण)
जब शनि आपकी राशि से 12वें घर में आते हैं। इस दौरान खर्च बढ़ते हैं, विदेश यात्रा के योग, नींद की समस्या है, मन परेशान रहता है। यह साढ़े साती सिर पर चढ़ती है और इसे शुरुआती चरण कहते हैं। काम में अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
दूसरा चरण - (मध्य चरण)
जब शनि आपकी राशि में ही आ जाते हैं। इसे सबसे अहम माना जाता है, जिम्मेदारी सबसे ज्यादा बढ़ती है। यह साढ़े साती हृदय से होते हुए मध्य अवस्था में होती है। नौकरी, कारोबार, घर, सेहत सबकी परीक्षा होती है। काम में देरी और तनाव हो सकता है। ऐसे में धैर्य रखें।
तीसरा चरण - ( अंतिम चरण)
जब शनि आपकी राशि से दूसरे घर में चले जाते हैं, तब धीरे-धीरे राहत मिलती है। रुके हुए काम बनते हैं। कहा जाता है कि साढ़े साती पांव से उतरती है। कर्ज और कोर्ट-कचहरी से छुटकारा मिलता है। शनि जाते-जाते आपको मजबूत बनाकर जाते हैं।
इन 3 राशियों पर है शनि की साढ़े साती
अगस्त 2026 में शनि मीन राशि में हैं। इसलिए अभी इन 3 राशियों पर साढ़े साती है -
मेष राशि - (पहला चरण) खर्च और टेंशन बढ़ सकती है। संभलकर चलें। 31 मई 2032 तक रहेगी।
मीन राशि - (दूसरा चरण) ये सबसे अहम समय है। जिम्मेदारी और परीक्षा दोनों बढ़ेंगी। 8 अगस्त 2029 तक रहेगी।
कुंभ राशि - (तीसरा चरण) राहत का समय। 3 जून 2027 को साढ़े साती खत्म हो जाएगी।
साढ़े साती में क्या करें?
मेहनत और ईमानदारी न छोड़ें।
शनिवार को गरीबों को दान करें, हनुमान जी की पूजा करें।
धैर्य रखें, क्योंकि शनि देर से प्रसन्न होते हैं।
शाम को पीपल के पेड़ के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं।