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Shardiya Navratri 2026: मां दुर्गा के 9 रूप और उनके गहरे रहस्य, जानें हर रूप का धार्मिक महत्व!

Vaishnavi DwivediVaishnavi DwivediUpdated 06 Oct 2026 01:04 PM IST
Shardiya Navratri 2026: मां दुर्गा के 9 रूप और उनके गहरे रहस्य, जानें हर रूप का धार्मिक महत्व!

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Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 दिव्य रूपों की पूजा की जाती है। आइए यहां मां शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक देवी नव रूपों का रहस्य समझते हैं।

सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रि का पर्व मां भगवती की भक्ति और शक्ति की पूजा का सबसे पावन अवसर माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है। देवी का हर रूप न  दिव्य शक्तियों का प्रतीक है, बल्कि जीवन को नई दिशा देने वाला एक गहरा रहस्य भी समेटे हुए है। आइए जानते हैं नवदुर्गा के 9 रूपों का रहस्य और उनका धार्मिक महत्व।

मां शैलपुत्री 

हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मी मां शैलपुत्री नवदुर्गा का पहला स्वरूप हैं। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल सुशोभित है। मां शैलपुत्री मूलाधार चक्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। इनकी पूजा से जीवन में स्थिरता, दृढ़ता और इच्छा शक्ति का संचार होता है।

मां ब्रह्मचारिणी 

ब्रह्म का मतलब है तपस्या और चारिणी का आचरण। कठिन तपस्या के कारण इन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया। देवी का यह रूप स्वाधिष्ठान चक्र से जुड़ा है। मां ब्रह्मचारिणी संयम, त्याग और निष्ठा का संदेश देती हैं। इनकी उपासना से साधक को सफलता और मानसिक शांति मिलती है।

मां चंद्रघंटा 

मां के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्रमा सुशोभित  है,इसीलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां का यह रूप मणिपुर चक्र को जाग्रत करता है। देवी का यह स्वरूप सिखाता है कि कैसे शांत रहते हुए भी बुराई के खिलाफ बिना डरे खड़े रहना चाहिए।

मां कूष्मांडा

अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने के कारण इन्हें कूष्मांडा कहा जाता है। इन्हें ही सृष्टि की आदि शक्ति  माना गया है। यह अनाहत चक्र की देवी हैं। इनकी पूजा से आरोग्य, यश और सभी तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

मां स्कंदमाता 

भगवान कार्तिकेय की माता होने की वजह से इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। मां गोद में बाल रूप स्कंद को लिए कमल के आसन पर विराजमान हैं। विशुद्ध चक्र से जुड़ी मां स्कंदमाता का यह रूप वात्सल्य और अपार ज्ञान का प्रतीक है। देवी की पूजा से संतान से जुड़ी सभी मुश्किलें दूर होती हैं।

 मां कात्यायनी 

महर्षि कात्यायन की तपस्या से खुश होकर उनके घर पुत्री रूप में जन्मी देवी को कात्यायनी कहा गया। इन्होंने ही महिषासुर का वध किया था। आज्ञा चक्र को नियंत्रित करने वाली मां कात्यायनी की पूजा से विवाह से जुड़ी सभी बाधाएं दूर होती हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।

मां कालरात्रि 

घने अंधकार की तरह काला वर्ण और उग्र रूप होने के बावजूद मां कालरात्रि शुभ फल देने वाली हैं, इसीलिए इन्हें शुभंकरी भी कहते हैं। यह सहस्रार चक्र की प्रतीक हैं। इनका रूप भले ही डरावना हो, लेकिन यह सभी प्रकार के भय और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करता है।

मां महागौरी

कठिन तपस्या के बाद जब भगवान शिव ने देवी को गंगाजल से स्नान कराया, तब इनका वर्ण कपूर के समान साफ हो गया। इसके बाद देवी के देवी को महागौरी नाम से जाना गया। देवी सोम चक्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। वह पवित्रता और पापों से मुक्ति का प्रतीक हैं। इनकी पूजा से पूर्व जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

मां सिद्धिदात्री

नवरात्र के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। ये सभी प्रकार की आठ सिद्धियों और नौ निधियों को प्रदान करने वाली देवी हैं। देवी का यह रूप पूर्णता का प्रतीक है। इनकी पूजा-अर्चना से साधक को जीवन में सभी सुख-सिद्धियों की प्राप्ति होती है।

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