
Varuthini Ekadashi 2026: वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को वरूथिनी एकादशी कहते हैं। इस साल वैशाख मास कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 13 अप्रैल की रात्रि 1 बजकर 16 मिनट से प्रारंभ होगी और इसका समापन 14 अप्रैल की रात्रि 1 बजकर 8 मिनट पर होगा। ऐसे में 13 अप्रैल को वरूथिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा और 14 अप्रैल को व्रत का पारण किया जाएगा। पारण का समय 14 अप्रैल की सुबह 6 बजकर 54 मिनट से लेकर 8 बजकर 30 मिनट तक रहने वाला है।
मान्यता है कि जो स्त्री-पुरुष इस दिन विधिवत ईश्वर की उपासना करता है, उसके जीवन से हर प्रकार के कलह-क्लेश दूर हो जाते हैं और वह सदा आनंद का भागी होता है। यदि आप अपने जीवन को खुशहाल बनाना चाहते हैं तो वरूथिनी एकादशी पर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा अवश्य करें और व्रत करने का प्रयास करें। ऐसा करने से आपको मोक्ष की प्राप्ति होगी, साथ ही श्रीकृष्ण के चरणों में स्थान मिलेगा। लेकिन इस एश्वर्य को प्राप्त करने के लिए आपको वरूथिनी एकादशी पर विशेष विधि से पूजन करना होगा। आइए जानते हैं कि किस विधि से आप वरूथिनी एकादशी पर पूजा कर सकते हैं जिससे ईश्वर प्रसन्न हों।
सुबह उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
चौंकी पर साफ वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
प्रभु को पीले रंग के फूल अर्पित करें क्योंकि ये रंग श्रीहरि को प्रिय है।
माता लक्ष्मी को सोलह श्रृंगार अर्पित करें। साथ ही तुलसी मां का विशेष पूजन करें।
इस दिन तुलसी में जल नहीं दिया जाता और ना हीं तुलसी दलों का चयन किया जाता है।
इसके बाद दीपक जलाकर आरती करें और श्रीहरि विशेष मंत्रों का जाप करें।
ईश्वर को फूल, सूखे मेवे, पंजीरी और पंचामृत का भोग लगाएं।
अंत में क्षमा प्रार्थना करें और जीवन में सुख-शांति के लिए कामना करें।
मंदिर में या जरूरतमंदों को अन्न और धन का दान करें।
ॐ विष्णवे नमः।
ॐ लक्ष्मीपतये नमः।
ॐ कृष्णाय नमः।
ॐ वैकुण्ठाय नमः।
ॐ गरुडध्वजाय नमः।
ॐ परब्रह्मणे नमः।
ॐ जगन्नाथाय नमः।
ॐ वासुदेवाय नमः।
ॐ त्रिविक्रमाय नमः।
ॐ दैत्यान्तकाय नमः।
ॐ मधुरिपवे नमः।
ॐ तार्क्ष्यवाहनाय नमः।
ॐ सनातनाय नमः।
ॐ नारायणाय नमः।
ॐ पद्मनाभाय नमः।
ॐ हृषीकेशाय नमः।
ॐ सुधाप्रदाय नमः।
ॐ माधवाय नमः।
ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः।
ॐ स्थितिकर्त्रे नमः।
ॐ परात्पराय नमः।
ॐ वनमालिने नमः।
ॐ यज्ञरूपाय नमः।
ॐ चक्रपाणये नमः।
ॐ गदाधराय नमः।
ॐ उपेन्द्राय नमः।
ॐ केशवाय नमः।
ॐ हंसाय नमः।
ॐ समुद्रमथनाय नमः।
ॐ हरये नमः।
ॐ गोविन्दाय नमः।
ॐ ब्रह्मजनकाय नमः।
ॐ कैटभासुरमर्दनाय नमः।
ॐ श्रीधराय नमः।
ॐ कामजनकाय नमः।
ॐ शेषशायिने नमः।
ॐ चतुर्भुजाय नमः।
ॐ पाञ्चजन्यधराय नमः।
ॐ श्रीमते नमः।
ॐ शार्ङ्गपाणये नमः।
ॐ जनार्दनाय नमः।
ॐ पीताम्बरधराय नमः।
ॐ देवाय नमः।
ॐ सूर्यचन्द्रविलोचनाय नमः।
ॐ मत्स्यरूपाय नमः।
ॐ कूर्मतनवे नमः।
ॐ क्रोडरूपाय नमः।
ॐ नृकेसरिणे नमः।
ॐ वामनाय नमः।
ॐ भार्गवाय नमः।
ॐ रामाय नमः।
ॐ बलिने नमः।
ॐ कल्किने नमः।
ॐ हयाननाय नमः।
ॐ विश्वम्भराय नमः।
ॐ शिशुमाराय नमः।
ॐ श्रीकराय नमः।
ॐ कपिलाय नमः।
ॐ ध्रुवाय नमः।
ॐ दत्तत्रेयाय नमः।
ॐ अच्युताय नमः।
ॐ अनन्ताय नमः।
ॐ मुकुन्दाय नमः।
ॐ दधिवामनाय नमः।
ॐ धन्वन्तरये नमः।
ॐ श्रीनिवासाय नमः।
ॐ प्रद्युम्नाय नमः।
ॐ पुरुषोत्तमाय नमः।
ॐ श्रीवत्सकौस्तुभधराय नमः।
ॐ मुरारातये नमः।
ॐ अधोक्षजाय नमः।
ॐ ऋषभाय नमः।
ॐ मोहिनीरूपधारिणे नमः।
ॐ सङ्कर्षणाय नमः।
ॐ पृथवे नमः।
ॐ क्षीराब्धिशायिने नमः।
ॐ भूतात्मने नमः।
ॐ अनिरुद्धाय नमः।
ॐ भक्तवत्सलाय नमः।
ॐ नराय नमः।
ॐ गजेन्द्रवरदाय नमः।
ॐ त्रिधाम्ने नमः।
ॐ भूतभावनाय नमः।
ॐ श्वेतद्वीपसुवास्तव्याय नमः।
ॐ सनकादिमुनिध्येयाय नमः।
ॐ भगवते नमः।
ॐ शङ्करप्रियाय नमः।
ॐ नीलकान्ताय नमः।
ॐ धराकान्ताय नमः।
ॐ वेदात्मने नमः।
ॐ बादरायणाय नमः।
ॐ भागीरथीजन्मभूमिपादपद्माय नमः।
ॐ सतां प्रभवे नमः।
ॐ स्वभुवे नमः।
ॐ विभवे नमः।
ॐ घनश्यामाय नमः।
ॐ जगत्कारणाय नमः।
ॐ अव्ययाय नमः।
ॐ बुद्धावताराय नमः।
ॐ शान्तात्मने नमः।
ॐ लीलामानुषविग्रहाय नमः।
ॐ दामोदराय नमः।
ॐ विराड्रूपाय नमः।
ॐ भूतभव्यभवत्प्रभवे नमः।
ॐ आदिदेवाय नमः।
ॐ देवदेवाय नमः।
ॐ प्रह्लादपरिपालकाय नमः।
ॐ श्रीमहाविष्णवे नमः।
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