इस नवरात्री अपने अंदर की शक्ति को जगाएं।
धन एक शक्ति है, इसीलिए धनवान अकसर बिगड़ जाते हैं, उनमें अहंकार आ जाता है। शरीर का बल भी एक शक्ति है, जिसके पास पैसा नहीं, वह मार-पिटाई करके अपना वर्चस्व बनाने की कोशिश करता है। विद्या भी एक
शक्ति है, जो ज्यादा पढ़-लिख जाए, उसका दिमाग भी कई बार खराब हो जाता है। अभिमान मतलब राक्षस। चाहे तुम बहुत सुंदर हो, फिर भी अपने स्वभाव से राक्षस हो सकते हो। अभिमान, ईर्ष्या, क्रोध, वैमनस्य राक्षस बना देता है।
महिषासुर कौन है? तुम्हारा अवचेतन मन ही महिषासुर है। इस अवचेतन मन में सारे पाप-पुण्य हैं। महिष मतलब भय। वह असुर, जो महिष जैसा दिखता है। अज्ञान काले रंग का प्रतीक है। ज्ञान श्वेत, उज्ज्वलता का प्रतीक है। अज्ञान, हमारी आसक्ति, हमारे पाप ये सब महिषासुर ही तो हैं। इस
महिषासुर को आदत है प्रताड़ित करने की। तुम्हें दुख कौन देता है? तुम्हारा भय। तुम्हारी वासनाएं तुम्हें दुख देती हैं। तुम्हारी आसक्तियां, तुम्हारा ममत्व तुम्हें दुख देता है। इसका नाश कैसे हो? इसलिए देवी उत्पन्न करनी पड़ेगी। इसी देवी को तंत्र में कुंडलिनी कहा।
वह शक्ति, जिसके द्वारा आप अपने अवचेतन मन में पड़े हुए इस महिषासुर नामी राक्षस को मार सकते हो, उसको उत्पन्न करना पड़ता है। सबको अपने अंदर इस देवी को जगाना पड़ता है। देवी को जगाने की साधना करनी होती है। जब वह जगती हैं, फिर तुम्हारे इस अवचेतन मन में पड़े हुए अंधकार और भयरूपी महिषासुर को मारती है। जो शक्ति अभी सुप्त है, वह हमसे दूर है। जब वह शक्ति जाग्रत होती है, तब चक्रों का भेदन होता है। जिस व्यक्ति का स्वाधिष्ठान चक्र खुल गया, ऐसे व्यक्ति को कामवासना कभी छू नहीं सकती।
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