
Teachers' Day: भारत में गुरु और शिष्य की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। भारत में प्राचीन काल से गुरुओं को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। हमारे सनातन संस्कृति में माता-पिता के बाद भगवान से पहले गुरु को माना जाता है। अपने गुरुओं और शिक्षकों का आभार प्रकट करने के लिए भारत में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। ये शिक्षक दिवस डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है। तो इसी क्रम में 10 प्राचीन गुरुओं और उनके शिष्यों के बारे में जानते हैं।
भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। महर्षि वेद व्यास को आध्यात्मिक ज्ञान का सागर माना जाता है। उन्हें वेदों, 18 पुराणों और महाभारत जैसे महान ग्रंथों का रचयिता माना जाता है। वेद व्यास को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है और उन्हें गुरु पूर्णिमा पर विशेष रूप से पूजा जाता है। उनके शिष्यों में ऋषि जैमिनी, वैशम्पायन और मुनि सुमंतु जैसे विद्वान शामिल थे।
महर्षि वाल्मीकि को रामायण के रचयिता के रूप में जाना जाता है। रामायण भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जो राम और रावण के बीच युद्ध की कहानी बताता है। वाल्मीकि ने लव और कुश नामक दो पुत्रों को गोद लिया था और उन्हें शास्त्र और शस्त्र का ज्ञान दिया था। लव और कुश ने ही रामायण का पाठ कर राम को भावुक कर दिया था।
द्रोणाचार्य को धनुर्विद्या का सर्वश्रेष्ठ गुरु माना जाता था। उन्होंने कौरवों और पांडवों दोनों को ही शस्त्र-विद्या सिखाई थी। द्रोणाचार्य का जन्म एक मिट्टी के बर्तन में हुआ था और उनके पिता महर्षि भारद्वाज थे। द्रोणाचार्य ने अर्जुन को एक महान धनुर्धर बनाया और एकलव्य के प्रति उनके व्यवहार ने नैतिकता पर एक गहन चर्चा को जन्म दिया।
विश्वामित्र एक महान ऋषि थे और उन्होंने भगवान राम और लक्ष्मण को कई दिव्य शस्त्रों का ज्ञान दिया था। विश्वामित्र ने अपनी तपस्या से देवताओं को भी प्रभावित किया था। एक बार तो उन्होंने क्रोध में आकर स्वयं एक अलग ब्रह्मांड की रचना कर ली थी।
परशुराम एक क्रोधी और शक्तिशाली ब्राह्मण योद्धा थे। उन्होंने क्षत्रियों के अत्याचारों से क्षुब्ध होकर 21 बार पृथ्वी से क्षत्रियों का संहार किया था। परशुराम को धनुर्विद्या में महारथ हासिल थी और उन्होंने भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महान योद्धाओं को शिक्षा दी थी।
शुक्राचार्य असुरों के गुरु थे और उन्हें मृत संजीवनी विद्या का ज्ञान था। उन्होंने देवताओं और असुरों दोनों को शिक्षा दी थी। शुक्राचार्य की बुद्धि और कूटनीति के किस्से प्रसिद्ध हैं।
सूर्यवंश के कुल गुरु थे और उन्होंने राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न जैसे महान राजकुमारों को शिक्षा दी थी। वशिष्ठ एक महान ऋषि थे और उन्होंने धर्म और अध्यात्म के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
बृहस्पति को देवताओं का गुरु माना जाता था। वह देवताओं को शस्त्र-विद्या और धार्मिक ज्ञान सिखाते थे। बृहस्पति की बुद्धि और विद्वता के किस्से प्रसिद्ध हैं।
कृपाचार्य कौरवों और पांडवों दोनों के गुरु थे। उन्होंने अपने शिष्यों को धनुर्विद्या और शस्त्र-विद्या सिखाई थी। कृपाचार्य एक महान योद्धा और विद्वान थे।
शंकराचार्य वेदांत दर्शन के प्रवर्तक थे और उन्होंने हिंदू धर्म को एक नई दिशा दी। शंकराचार्य ने बहुत कम उम्र में वेदों का अध्ययन कर लिया था और उन्होंने भारत के विभिन्न भागों में जाकर धर्म का प्रचार किया
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