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Char Dham Yatra 2026 Closing Dates: साल 2026 की चारधाम यात्रा के समापन का समय करीब आ गया है। आइए इस आर्टिकल में बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट बंद होने की डेट जानते हैं।
उत्तराखंड की पावन भूमि पर स्थित चारधाम की यात्रा हर किसी के लिए बेहद पावन मानी जाती है। हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा केदार और भगवान बदरीनाथ के दर्शन करने जाते हैं, लेकिन अगर आप भी इस साल चारधाम यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो अब देर मत कीजिए। सर्दियों के आगमन के साथ ही चारधामों (Char Dham Yatra 2026) के कपाट बंद होने का समय बहुत करीब आ गया है। इसके बाद अगले छह महीनों के लिए धामों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। आइए कपाट बंद होने की तिथि, दर्शन का समय और इसके पीछे की पौराणिक मान्यता जानते हैं।
कब बंद होंगे चारों धाम के कपाट? (Char Dham Yatra 2026 Closing Dates 2026)
- गंगोत्री धाम: 10 नवंबर 2026 को दोपहर 12:05 बजे कपाट बंद होंगे।
- केदारनाथ धाम: 11 नवंबर 2026 को सुबह 8:30 बजे कपाट बंद होंगे।
- यमुनोत्री धाम: 11 नवंबर 2026 को भैया दूज के अवसर पर सुबह 10:28 बजे कपाट बंद होंगे।
- बद्रीनाथ धाम: 16 नवंबर 2026 को रात 09:37 बजे कपाट बंद होंगे।
कपाट बंद होने की तिथियां
हर साल कार्तिक महीने के त्योहारों के आसपास चारधाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाते हैं।
- गंगोत्री धाम: गोवर्धन पूजा के शुभ अवसर पर गंगोत्री धाम के कपाट सबसे पहले बंद किए जाते हैं।
- केदारनाथ और यमुनोत्री धाम: भैया दूज के पावन दिन बाबा केदारनाथ और मां यमुनोत्री के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं।
- बदरीनाथ धाम: देव दीपावली के आसपास विजयदशमी पर तय की गई तिथि के अनुसार भगवान बदरीविशाल के कपाट बंद होते हैं।
- ध्यान रखें ये बातें: कपाट बंद होने से 4-5 दिन पहले ही दर्शन की समय-सीमा सीमित कर दी जाती है, इसलिए अपनी यात्रा का समय रहते रजिस्ट्रेशन जरूर कर लें।
कपाट बंद होने के बाद कहां होंगे भगवान के दर्शन?
- बाबा केदारनाथ: उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान होते हैं।
- भगवान बदरीनाथ: जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में विराजते हैं।
- मां गंगोत्री: मुखबा गांव में विराजती हैं।
- मां यमुनोत्री: खरसाली गांव में विराजती हैं।
चारधाम से जुड़ी प्रमुख बातें
चारधाम यात्रा और कपाट बंद होने के पीछे एक बहुत ही पावन धार्मिक मान्यता जुड़ी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सर्दियों में धामों के कपाट इंसानों के लिए बंद कर दिए जाते हैं, तब वहां देवताओं द्वारा पूजा शुरू होती है। शास्त्रों के अनुसार, बदरीनाथ धाम में शीतकाल के छह महीनों तक स्वयं देवर्षि नारद जी भगवान विष्णु की मुख्य पुजारी के रूप में पूजा करते हैं। कपाट बंद करते समय मंदिर के अंदर एक अखंड दीपक जलाया जाता है। चमत्कार यह है कि जब छह महीने बाद वैशाख में कपाट दोबारा खोले जाते हैं, तो वह दीपक वैसा ही जलता हुआ मिलता है और भगवान की पूजा की सामग्री वैसी ही मिलती है। यह इस बात का प्रमाण है कि वहां देव-शक्तियां निवास करती हैं।
ध्यान रखने योग्य बातें
- इस दौरान तामसिक चीजों और बुरे विचारों से परहेज करें।
- गरम कपड़े और जरूरी दवाइयां जरूर रखें।
- यात्रा पर निकलने से पहले मौसम की सटीक जानकारी जरूर लें।
- बिना उत्तराखंड सरकार के ई-पास या रजिस्ट्रेशन के यात्रा न करें।