
Darsha Amavasya: हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रति महीने एक पूर्णिमा और एक अमावस्या आती है। मार्गशीर्ष मास में आने वाली अमावस्या को दर्श अमावस्या कहते हैं। इस साल अमावस्या तिथि 19 नवंबर को सुबह 9 बजकर 43 मिनट पर प्रारंभ होगी और 20 नवंबर की दोपहर 12 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी। कई लगों के मन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि किस दिन अमावस्या मनाई जाएगी। पंचांग मुताबिक 19 नवंबर को ये पर्व मनाया जाएगा। अमावस्या के दिन चंद्रमा नजर नहीं आता है, यदि आप इस खास दिन पर चंद्रदेव की कृपा पाना चाहते हैं तो अमावस्या पर विशेष विधि से पूजन करें।
दर्श अमावस्या के दिन कई शुभ संयोग बनने जा रहे है, आइए जानते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 5 बजे से लेकर 5 बजकर 54 मिनट तक।
विजय मुहूर्त - दोपहर 1 बजकर 53 मिनट से लेकर 2 बजकर 35 मिनट तक।
गोधूलि मुहूर्त - शाम 5 बजकर 26 मिनट से 5 बजकर 53 मिनट तक।
अमृत काल - 20 नवंबर मध्यरात्रि से 2 बजकर 53 मिनट तक।
निशिता मुहूर्त - रात्रि 11 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 34 मिनट तक।
दर्श अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
इसके बाद सच्चे मन से व्रत का संकल्प लें।
इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर को एक पटके पर साफ कपड़ा बिछाकर विराजित करें
मंदिर समेत पूरे घर में गंगाजल से छिड़काव करें।
भगवान शिव और माता पार्वती का जलाभिषेक करें।
शिवलिंग पर दूध, फूल, फल, भांग और धतूरा अर्पित करें।
इसके बाद माता पार्वती को सोलह श्रृंगार का समान अर्पित करें।
भगवान शिव के सामने घी का दीपक जलाएं और ऊण नम शिवाय मंत्र का जाप करें।
इसके साथ ही चंद्र देव की स्तुति करें।
शिव चालीसा का पाठ करें।
अंत में क्षमा प्रार्थना करें।
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