
आज धन्वंतरि जयंती (Dhanvantari Jayanti 2026) का पर्व मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान धन्वंतरि को देवताओं के वैद्य माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान धन्वंतरि की पूजा करने और कुछ खास नियमों का पालन करने से घर के सभी सदस्यों की सेहत अच्छी रहती है और रोग-दोष से छुटकारा मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं धन्वंतरि जयंती पर पूजा करने के सही नियम और इसकी पौराणिक कथा क्या है?
जब देवताओं और असुरों के बीच क्षीर सागर का समुद्र मंथन हुआ था, तब उसमें से कुल चौदह रत्न निकले थे। इस भयंकर मंथन के अंत में कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धन्वंतरि भी प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि जब प्रकट हुए थे, तब उनके दोनों हाथों में अमृत से भरा कलश और आयुर्वेद के ग्रंथ थे। कहते हैं कि वह संसार को बीमारियों से मुक्त करने और निरोगी काया देने के लिए प्रकट हुए थे, इसलिए उन्हें औषधियों का देवता कहा गया। तभी से हर साल त्रयोदशी तिथि को धन्वंतरि जयंती मनाई जाती है।
भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से शारीरिक और मानसिक सेहत अच्छी रहती है, जो लोग हमेशा किसी न किसी बीमारी से परेशान रहते हैं, वे अगर इस दिन सच्चे मन से धन्वंतरि भगवान का ध्यान करें और उनकी विधिवत पूजा करें, तो उन्हें हमेशा के लिए सभी तरह के कष्टों से छुटकारा मिलता है।
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