Diwali 2026 Lakshmi Puja Vidhi: आज देशभर में दीपावली का पावन पर्व मनाया जा रहा है। आइए इस शुभ अवसर पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा विधि, प्रिय भोग, सिद्ध मंत्र, आरती और दीवाली की पौराणिक कथा को पढ़ते हैं।
कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि यानी आज पूरे देश में रोशनी और खुशियों का महापर्व दीपावली बहुत ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है। इस तिथि की रात को बेहद सिद्ध और पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीवाली की रात धन की देवी मां लक्ष्मी अपने भक्तों के घर पधारती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसलिए इस दिन पूरे विधि-विधान से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
दीवाली शुभ मुहूर्त (Diwali 2026 Shubh Muhurat)
लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त - शाम को 05 बजकर 54 मिनट से रात 07 बजकर 50 मिनट तक
वृषभ काल - शाम को 05 बजकर 54 मिनट से रात 07 बजकर 50 मिनट तक।
मां लक्ष्मी के प्रिय भोग और प्रिय फूल (Diwali 2026 Flower And Bhog)
प्रिय भोग: मां लक्ष्मी को कमलगट्टा, मखाना, केसर की खीर, सफेद मिठाई, खील-बताशे और नारियल बहुत प्रिय हैं। इस दिन की पूजा में मां को खीर और खील-बताशे का भोग जरूर लगाना चाहिए।
प्रिय फूल: मां लक्ष्मी को लाल कमल या लाल गुलाब का फूल बेहद प्रिय है।
दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजन विधि (Diwali 2026 Puja Vidhi)
घर के ईशान कोण या पूर्व दिशा में एक चौकी बिछाकर उस पर लाल कपड़ा बिछाएं।
उस पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति इस प्रकार रखें कि मां लक्ष्मी हमेशा गणेश जी के दाहिनी ओर विराजमान हों।
चौकी के पास एक तांबे के लोटे में जल, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते रखकर कलश स्थापित करें।
इसके बाद देसी घी का एक अखंड दीपक और सरसों के तेल के दीए जलाएं।
मां लक्ष्मी और गणेश जी को रोली, चंदन, अक्षत और कुमकुम का तिलक लगाएं।
मां को लाल चुनरी और गणेश जी को जनेऊ अर्पित करें।
मां के चरणों में कमल का फूल या लाल गुलाब चढ़ाएं।
इसके बाद खील-बताशे, फल, मिठाई और खीर का भोग लगाएं।
पूजा के दौरान मन ही मन मां लक्ष्मी का ध्यान करें और उनके सिद्ध मंत्र का जाप करें।
अंत में आरती करें।
इसके बाद में पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।
मां लक्ष्मी के सिद्ध मंत्र (Diwali 2026 Puja Lakshmi Mantra)
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मी नमः।।
दीवाली की पौराणिक कथा (Diwali 2026 Katha)
दीवाली मनाने के पीछे सबसे प्रमुख पौराणिक कथा भगवान श्री राम की है। त्रेतायुग में जब भगवान श्री राम 14 साल का वनवास पूरा कर और लंकापति रावण का संहार कर अयोध्या लौटे थे, तब उनके आने की खुशी में पूरी अयोध्या नगरी को दीयों की रोशनी से सजाया गया था। कार्तिक अमावस्या की काली रात दीयों के उजाले से जगमगा उठी थी। इसके अलावा, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान धन और ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी का प्राकट्य भी हुआ था। यही वजह है कि इस दिन मां लक्ष्मी का स्वागत दीए जलाकर और खुशी मनाकर किया जाता है।