Durga Visarjan 2026 Rules And Mistakes: दुर्गा विसर्जन के दिन किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है? आइए यहां सही नियम जानते हैं।
शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा की नौ दिनों की भव्य आराधना के बाद विजयादशमी के दिन समाप्त होता है। नौ दिनों तक मां की पूजा-अर्चना, व्रत और हवन करने के बाद दशमी तिथि को मां को विदा किया जाता है, जिसे दुर्गा विसर्जन कहा जाता है। यह पल भक्तों के लिए थोड़ा भावुक करने वाला होता है, क्योंकि इन नौ दिनों में मां हमारे घर की एक सदस्य की तरह विराजमान रहती हैं। शास्त्रों में दुर्गा विसर्जन के कुछ खास नियम बताए गए हैं। अगर विसर्जन के दौरान कुछ जरूरी बातों का ध्यान न रखा जाए, तो पूजा का पूरा फल नहीं मिलता है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि दुर्गा विसर्जन के समय किन गलतियों से बचना चाहिए और सही नियम क्या हैं?
दुर्गा विसर्जन करने के लिए सबसे अच्छा समय दशमी तिथि की सुबह 6:00 बजे से 10:00 बजे के बीच का होता है। इसके साथ ही रात के समय या प्रदोष काल में मां दुर्गा का विसर्जन करना पूरी तरह वर्जित माना गया है।
दुर्गा विसर्जन के दौरान न करें ये गलतियां (Durga Visarjan 2026 Mistakes to Avoid)
अचानक या बिना मुहूर्त के विसर्जन न करें
विसर्जन का एक निश्चित समय यानी शुभ मुहूर्त होता है। कभी भी अपनी मर्जी से या राहुकाल के समय मां की प्रतिमा या कलश का विसर्जन नहीं करना चाहिए। दशमी तिथि समाप्त होने से पहले ही विसर्जन कर लेना शुभ माना जाता है।
गुस्सा या जल्दबाजी न दिखाएं
मां दुर्गा को विदा करते समय मन में किसी भी प्रकार का गुस्सा, जल्दबाजी या नकारात्मक विचार नहीं लाने चाहिए। विसर्जन हमेशा शांत मन से माता को धन्यवाद देते हुए करना चाहिए।
सामग्री का अनादर न करें
विसर्जन के समय कलश के पानी, नारियल, जौ और पूजा की सामग्री को इधर-उधर या गंदी जगह पर नहीं फेंकना चाहिए।
कलश के पवित्र जल को पूरे घर में छिड़कना चाहिए और बचे हुए जल को तुलसी या किसी पवित्र पौधे में डालना चाहिए।
जवारे को परिवार के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांटना चाहिए और कुछ हिस्सा तिजोरी में संभाल कर रखना शुभ होता है।
क्षमा प्रार्थना न भूलना
विसर्जन से पहले मां से अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए माफी जरूर मांगनी चाहिए। बिना क्षमा प्रार्थना के विसर्जन अधूरा माना जाता है।
दुर्गा विसर्जन की सही विधि (Durga Visarjan 2026 Rules)
विसर्जन से पहले दशमी तिथि की सुबह मां दुर्गा की षोडशोपचार विधि से पूजा करें। मां को खीर, पूरी और मिठाइयों का भोग लगाएं।
विधि-विधान से आरती करें और क्षमा मंत्र बोलकर मां का आह्वान करें कि वे अगले साल फिर से हमारे घर आएं।
विसर्जन के समय कलश को धीरे से स्पर्श करके अपनी जगह से थोड़ा खिसकाएं। अगर आप मूर्ति की पूजा कर रहे हैं, तो उसे पूरे सम्मान के साथ पवित्र नदी में विसर्जित करें या घर के गमले में प्रवाहित करें।
दुर्गा विसर्जन का महत्व (Durga Visarjan 2026 Significance)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन मां दुर्गा कैलाश पर्वत के लिए प्रस्थान करती हैं। विसर्जन का मतलब यह नहीं है कि मां हमसे दूर जा रही हैं, बल्कि इसका मतलब यह है कि मां हमारे अंदर की बुराइयों और नकारात्मकता को अपने साथ ले जाती हैं और हमें शक्ति व आशीर्वाद देकर जाती हैं।